एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल जयपुर में हुई लिम्फेडेमा सर्जरी,15 साल से पैर की सूजन से जूझ रहे मरीज को मिली राहत
० आशा पटेल ०
जयपुर, एक दशक से अधिक समय से मरीज लिम्फेडेमा से जूझ रहा था । यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का लिम्फेटिक सिस्टम अतिरिक्त तरल पदार्थ को ठीक से बाहर निकाल नहीं पाता, जिसके कारण लगातार सूजन बनी रहती है।इस दौरान मरीज की सूजन गंभीर होती गई, जिससे मरीज को चलने-फिरने, रोजमर्रा के काम करने और सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होने लगी।
सर्जरी के दौरान मरीज के दाएं कंधे के क्षेत्र से स्वस्थ लिम्फ नोड टिश्यू को सावधानीपूर्वक लिया गया और उसे पिंडली में प्रत्यारोपित किया गया। उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों का उपयोग करते हुए डॉक्टरों ने बेहद छोटी रक्त वाहिकाओं को जोड़ा, ताकि प्रत्यारोपित टिश्यू को पर्याप्त रक्त आपूर्ति मिल सके और वह लिम्फेटिक ड्रेनेज में सहायता करना शुरू कर सके।सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी सुचारू और बिना किसी जटिलता के हो रही है । वह अच्छी तरह स्वस्थ हुए और सर्जरी के तीसरे दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मरीज की करीबी चिकित्सकीय निगरानी में अच्छी रिकवरी हुई। उनके पैर के आकार में लगभग 80% की कमी आई है। उन्होंने लक्षणों में भी महत्वपूर्ण सुधार की जानकारी दी है। प्रभावित पैर में पहले महसूस होने वाले भारीपन और परेशानी से उन्हें पूरी तरह राहत मिली है।
डॉ. मनीष जैन, कंसल्टेंट प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी ने कहा “इस सर्जरी में असाधारण प्रयास की आवश्यकता होती है, क्योंकि हम ऐसी रक्त वाहिकाओं के साथ काम करते हैं, जिनका आकार केवल कुछ मिलीमीटर होता है। हर चरण की सावधानीपूर्वक योजना बनाना और उसे सही तरीके से पूरा करना जरूरी होता है। इस प्रक्रिया की सफलता एचसीजी में टीमवर्क की मजबूती और उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे उन मरीजों को उम्मीद मिलती है, जो कई वर्षों से लिम्फेडेमा के साथ जीवन जी रहे हैं।
मरीज ने कहा कि, “15 वर्षों से अधिक समय तक मैं लगातार सूजन और परेशानी से जूझता रहा था , जिसका असर मेरी रोजमर्रा की जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ा। मैंने लगभग यह स्वीकार कर लिया था कि मुझे जीवनभर इसी स्थिति के साथ रहना होगा। एचसीजी के डॉक्टरों ने मुझे उम्मीद दी, इलाज के हर चरण को समझाया और मेरी पूरी यात्रा के दौरान मेरा साथ दिया। आज मैं अपने भविष्य को लेकर कहीं अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहा हूं और मुझे बेहतर और स्वस्थ जीवन जीने का अवसर देने के
लिए पूरी एचसीजी टीम का धन्यवाद करता हूं।
डॉ. नरेश सोमानी डायरेक्टर ऑन्कोलॉजी एवं एचओडी मेडिकल ऑन्कोलॉजी ने कहा यह सफल सर्जरी एचसीजी जयपुर के लिए लिम्फेडेमा से पीड़ित मरीजों के लिए उन्नत उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक उपलब्धि है। Vascularized Lymph Node Transfer (VLNT) और Lympho-Venous Anastomosis (LVA) जैसी प्रक्रियाओं की सुविधा उपलब्ध कराकर अस्पताल का उद्देश्य लंबे समय से अंगों में सूजन से पीड़ित मरीजों को गतिशीलता वापस पाने, परेशानी कम करने और उनकी जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करना है।
जयपुर, एक दशक से अधिक समय से मरीज लिम्फेडेमा से जूझ रहा था । यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का लिम्फेटिक सिस्टम अतिरिक्त तरल पदार्थ को ठीक से बाहर निकाल नहीं पाता, जिसके कारण लगातार सूजन बनी रहती है।इस दौरान मरीज की सूजन गंभीर होती गई, जिससे मरीज को चलने-फिरने, रोजमर्रा के काम करने और सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होने लगी।
नागौर के 61 वर्षीय एक पुरुष मरीज, जो पिछले 15 वर्षों से बाएं पैर में गंभीर सूजन से जूझ रहे थे, को एचसीजी हॉस्पिटल जयपुर के डॉक्टरों द्वारा अस्पताल की पहली वैस्कुलराइज्ड लिम्फ नोड ट्रांसफर सर्जरी सफलतापूर्वक किए जाने के बाद नई उम्मीद मिली। यह प्रक्रिया एचसीजी में उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे लंबे समय से लिम्फेडेमा से पीड़ित मरीजों को ऐसी विशेष उपचार सुविधा मिल सकेगी, जो समस्या के मूल रूप से समाप्त करती है।
सर्जरी सहित पारम्परिक उपचारों को आजमाने के बावजूद मरीज को परेशानी बनी रही और उन्होंने एचसीजी में विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता ली। पूरी जांच के बाद मेडिकल टीम ने वैस्कुलराइज्ड लिम्फ नोड ट्रांसफर को मरीज के लिए सबसे उपयुक्त उपचार माना। इस प्रक्रिया में शरीर के एक हिस्से से स्वस्थ लिम्फ नोड्स को निकालकर प्रभावित हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है। इससे लिम्फेटिक फ्लूइड के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने और समय के साथ सूजन को कम करने में मदद मिलती है।
यह सर्जरी hcg होस्पिटल के डॉ. सौरभ गर्ग और डॉ. मनीष जैन, डॉ. गौरव गोयल का सहयोग रहा, इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया प्रबंधन के लिए डॉ. विकास लाखोटिया का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। विशेषज्ञ मार्गदर्शन और सहयोग से सर्जरी को सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
सर्जरी के दौरान मरीज के दाएं कंधे के क्षेत्र से स्वस्थ लिम्फ नोड टिश्यू को सावधानीपूर्वक लिया गया और उसे पिंडली में प्रत्यारोपित किया गया। उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों का उपयोग करते हुए डॉक्टरों ने बेहद छोटी रक्त वाहिकाओं को जोड़ा, ताकि प्रत्यारोपित टिश्यू को पर्याप्त रक्त आपूर्ति मिल सके और वह लिम्फेटिक ड्रेनेज में सहायता करना शुरू कर सके।सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी सुचारू और बिना किसी जटिलता के हो रही है । वह अच्छी तरह स्वस्थ हुए और सर्जरी के तीसरे दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मरीज की करीबी चिकित्सकीय निगरानी में अच्छी रिकवरी हुई। उनके पैर के आकार में लगभग 80% की कमी आई है। उन्होंने लक्षणों में भी महत्वपूर्ण सुधार की जानकारी दी है। प्रभावित पैर में पहले महसूस होने वाले भारीपन और परेशानी से उन्हें पूरी तरह राहत मिली है।
मरीज को नियमित फॉलो-अप और रिहैबिलिटेशन की सलाह दी गई है, जिससे समय के साथ लिम्फेटिक फंक्शन में और सुधार तथा सूजन में कमी आने की उम्मीद है। डॉ. सौरभ गर्ग, कंसल्टेंट – प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी, ने कहा, “लिम्फेडेमा से पीड़ित कई मरीजों को लगता है कि उन्हें जीवनभर सूजन के साथ ही रहना होगा, क्योंकि उपचार के विकल्प सीमित हैं।
आज Vascularized Lymph Node Transfer और Lympho-Venous Anastomosis जैसी उन्नत प्रक्रियाएं हमें केवल लक्षणों को नियंत्रित करने के बजाय समस्या के मूल कारण का उपचार करने की सुविधा देती हैं। हमारी पहली VLNT सर्जरी का सफलतापूर्वक किया जाना एचसीजी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह राजस्थान में मरीजों के और करीब उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव उपचार उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डॉ. मनीष जैन, कंसल्टेंट प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी ने कहा “इस सर्जरी में असाधारण प्रयास की आवश्यकता होती है, क्योंकि हम ऐसी रक्त वाहिकाओं के साथ काम करते हैं, जिनका आकार केवल कुछ मिलीमीटर होता है। हर चरण की सावधानीपूर्वक योजना बनाना और उसे सही तरीके से पूरा करना जरूरी होता है। इस प्रक्रिया की सफलता एचसीजी में टीमवर्क की मजबूती और उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे उन मरीजों को उम्मीद मिलती है, जो कई वर्षों से लिम्फेडेमा के साथ जीवन जी रहे हैं।
मरीज ने कहा कि, “15 वर्षों से अधिक समय तक मैं लगातार सूजन और परेशानी से जूझता रहा था , जिसका असर मेरी रोजमर्रा की जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ा। मैंने लगभग यह स्वीकार कर लिया था कि मुझे जीवनभर इसी स्थिति के साथ रहना होगा। एचसीजी के डॉक्टरों ने मुझे उम्मीद दी, इलाज के हर चरण को समझाया और मेरी पूरी यात्रा के दौरान मेरा साथ दिया। आज मैं अपने भविष्य को लेकर कहीं अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहा हूं और मुझे बेहतर और स्वस्थ जीवन जीने का अवसर देने के
लिए पूरी एचसीजी टीम का धन्यवाद करता हूं।
डॉ. नरेश सोमानी डायरेक्टर ऑन्कोलॉजी एवं एचओडी मेडिकल ऑन्कोलॉजी ने कहा यह सफल सर्जरी एचसीजी जयपुर के लिए लिम्फेडेमा से पीड़ित मरीजों के लिए उन्नत उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक उपलब्धि है। Vascularized Lymph Node Transfer (VLNT) और Lympho-Venous Anastomosis (LVA) जैसी प्रक्रियाओं की सुविधा उपलब्ध कराकर अस्पताल का उद्देश्य लंबे समय से अंगों में सूजन से पीड़ित मरीजों को गतिशीलता वापस पाने, परेशानी कम करने और उनकी जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करना है।
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