यक़ीन

मुहम्मद नासिर ० 

मैं दौलत की कमी में
देखता हूँ
अपने हाथों की लकीरें
और याद करता हूँ
माँ की दी हुई दुआएं
"राजा बनेगा बेटा मेरा"
मैं जानता हूँ
मेरे हाथों की लकीरें
और माँ की दुआएं
कभी झूठी नहीं हो सकतीं।
इसलिए
आज भी पुर उम्मीद हूँ
अधूरी 
ख्वाहिशों के साथ। 

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