नव वर्ष नया हर्ष हो – नव वर्ष नव हर्ष हो

० शेख अब्दुल वहाब ० 
नव वर्ष नया हर्ष हो –
नव वर्ष नव हर्ष हो
जीवन है संघर्ष स्वीकार सहर्ष हो
नई उमंग नया उल्लास हो
नया उत्साह जीवन भर हो

नव तरंग मन में दूर हो दुःख
दूर वेदनाएं, विपदाएं हो विमुख
केवल श्रम से प्राप्त सुख हो
मुख पर न हो मुखौटा झूठा
मानव मन का शुद्ध हो जीवन अनूठा
परनिर्भर नहीं आत्म निर्भर हो

जन त्यागे स्वार्थ को अपना
उपकार परोपकार परमार्थ जानें
ईश्वर में हो आस्था छल कपट का भाव न हो
ममता - मनुष्यता का अभाव न हो
हिंसा को कर नकार अहिंसा को अपनाएं

बना रहे जन मन में यह भाव
अक्षुण्ण हो सांप्रदायिक सद्भाव
कभी न घेरे निराशा घन आलोडित हों आशाएं मन
धीरज धरे मन सदा, सकारात्मक जीवन हो l
नव वर्ष नव हर्ष हो
जीवन है संघर्ष स्वीकार सहर्ष हो
-०-

टिप्पणियाँ

Dr.Wahab ने कहा…
"नूतन वर्ष
चुनौतियां भी नई
संघर्ष नया"

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