जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल : किताबों,विचारों और संवाद के ज़रिए भारत की सोच के 20 सालों का जश्न
० आशा पटेल ०
जयपुर, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल जनवरी 2027 में अपने 20वें संस्करण के आयोजन की तैयारी कर रहा है। फ़ेस्टिवल नहीं अपने उन दो दशकों का जश्न मना रहा है जिनमें वह लेखकों, विचारकों, कलाकारों और दर्शकों के साथ उन किताबों को एक मंच पर लेकर आया जिन्होंने हमें दुनिया को समझने में मदद की है।2006 में अपनी स्थापना के बाद से, फ़ेस्टिवल ने 8,000 से अधिक लेखकों, वक्ताओं और कलाकारों की मेज़बानी की है, 50 लाख से अधिक दर्शकों का स्वागत किया है, और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, प्रसारण सहयोगियों और मीडिया नेटवर्क के माध्यम से 1 अरब से अधिक दर्शकों तक अपनी पहुँच बनाई है।फ़ेस्टिवल एक ऐसा साझा स्थान बन गया है जहाँ साहित्य, इतिहास, राजनीति, विज्ञान, दर्शन, कला और समकालीन संस्कृति के बीच संवाद की अविरल धारा बहती है। जयपुर से लेकर पूरी दुनिया तक, फ़ेस्टिवल का विस्तार एक अंतरराष्ट्रीय परिघटना की तरह हुआ है, इस में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व, मालदीव और आयरलैंड जैसे देशों के 15 से अधिक संस्करण शामिल हैं।
बहुभाषी कार्यक्रमों, अनुवाद-सत्रों, और भारतीय व अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के लेखकों के माध्यम से, फ़ेस्टिवल ने क्षेत्रीय आवाज़ों और साहित्यिक परंपराओं को एक बड़े दर्शक-समूह तक पहुँचाने के रास्ते बनाए हैं, जो इस विश्वास को दर्शाता है कि हर भाषा में ऐसी कहानियाँ, इतिहास और आयाम होते हैं जो व्यापक सांस्कृतिक संवाद को समृद्ध करते हैं। अपनी 20वीं वर्षगांठ के इस पड़ाव के हिस्से के रूप में, फ़ेस्टिवल की यह घोषणा भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में एक साथ जारी की गई है।
विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल" की थीम पर आधारित, 20वां संस्करण निरंतरता और विकास दोनों को प्रतिबिंबित करता है। टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक और जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के निर्माता संजॉय के. रॉय ने कहा बीस वर्षों से, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल इस सहज विश्वास पर कायम रहा है कि किताबों और विचारों में लोगों को साथ लाने की शक्ति होती है।
टीमवर्क आर्ट्स की प्रमुख प्रीता सिंह ने कहा बीते दो दशकों में, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल दुनिया के अग्रणी साहित्यिक और सांस्कृतिक मंचों में से एक बनकर उभरा है। फ़ेस्टिवल किताबों, विचारों और सार्थक संवाद की शक्ति में अपने भरोसे के साथ खड़ा रहा है। यह यात्रा न केवल असाधारण लेखकों और दर्शकों से संभव हुई है, बल्कि हमारे उन साझेदारों, प्रायोजकों और संस्थानों के सहयोग से भी संभव हुई है जो संस्कृति की परिवर्तनकारी भूमिका में हमारे विश्वास के साझीदार हैं।
जयपुर, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल जनवरी 2027 में अपने 20वें संस्करण के आयोजन की तैयारी कर रहा है। फ़ेस्टिवल नहीं अपने उन दो दशकों का जश्न मना रहा है जिनमें वह लेखकों, विचारकों, कलाकारों और दर्शकों के साथ उन किताबों को एक मंच पर लेकर आया जिन्होंने हमें दुनिया को समझने में मदद की है।2006 में अपनी स्थापना के बाद से, फ़ेस्टिवल ने 8,000 से अधिक लेखकों, वक्ताओं और कलाकारों की मेज़बानी की है, 50 लाख से अधिक दर्शकों का स्वागत किया है, और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, प्रसारण सहयोगियों और मीडिया नेटवर्क के माध्यम से 1 अरब से अधिक दर्शकों तक अपनी पहुँच बनाई है।फ़ेस्टिवल एक ऐसा साझा स्थान बन गया है जहाँ साहित्य, इतिहास, राजनीति, विज्ञान, दर्शन, कला और समकालीन संस्कृति के बीच संवाद की अविरल धारा बहती है। जयपुर से लेकर पूरी दुनिया तक, फ़ेस्टिवल का विस्तार एक अंतरराष्ट्रीय परिघटना की तरह हुआ है, इस में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व, मालदीव और आयरलैंड जैसे देशों के 15 से अधिक संस्करण शामिल हैं।
जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल विभिन्न संस्कृतियों के बीच सेतु बनकर उभरा है, जो भारत की साहित्यिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से जोड़ता है, साथ ही वैश्विक संवादों को भारतीय दृष्टि के साथ संवाद में लाता है। आज फ़ेस्टिवल का प्रभाव अपने आयोजित संस्करणों से कहीं आगे निकल चुका है, भारत और दुनियाभर में 300 से अधिक साहित्यिक आयोजन और फ़ेस्टिवल उस खुले साहित्यिक आदान-प्रदान की संस्कृति से प्रेरणा लेते हैं जिसको विकसित करने में जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल का बड़ा योगदान है।
फ़ेस्टिवल ने साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन की कुछ सबसे प्रभावशाली आवाज़ों की मेज़बानी की है, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता, बुकर पुरस्कार विजेता, राष्ट्राध्यक्ष, अर्थशास्त्री, दार्शनिक, कलाकार और वैश्विक विचारक शामिल हैं।
फ़ेस्टिवल की शानदार यात्रा राजस्थान सरकार के लगातार साथ देने से मुमकिन हुई है। 2008 में फ़ेस्टिवल शुरू होने से लेकर आज तक सरकार का यह साथ इसके विकास और पहचान का अहम हिस्सा रहा है। राजस्थान ने फ़ेस्टिवल को एक खास जगह और शानदार सांस्कृतिक माहौल दिया है। यह फेस्टिवल सिर्फ़ लेखकों और पाठकों की एक सभा से आगे बढ़कर दुनिया भर में मशहूर साहित्यिक और सांस्कृतिक मंच बन गया है।
फ़ेस्टिवल ने साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन की कुछ सबसे प्रभावशाली आवाज़ों की मेज़बानी की है, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता, बुकर पुरस्कार विजेता, राष्ट्राध्यक्ष, अर्थशास्त्री, दार्शनिक, कलाकार और वैश्विक विचारक शामिल हैं।
फ़ेस्टिवल की शानदार यात्रा राजस्थान सरकार के लगातार साथ देने से मुमकिन हुई है। 2008 में फ़ेस्टिवल शुरू होने से लेकर आज तक सरकार का यह साथ इसके विकास और पहचान का अहम हिस्सा रहा है। राजस्थान ने फ़ेस्टिवल को एक खास जगह और शानदार सांस्कृतिक माहौल दिया है। यह फेस्टिवल सिर्फ़ लेखकों और पाठकों की एक सभा से आगे बढ़कर दुनिया भर में मशहूर साहित्यिक और सांस्कृतिक मंच बन गया है।
इस फ़ेस्टिवल ने जयपुर और राजस्थान को दुनिया भर के साहित्यिक जगत में मज़बूत पहचान दिलाई है। स्वतंत्र विचार, सहजता और समावेशिता फ़ेस्टिवल की इस यात्रा के आधार-स्तंभ रहे हैं। एक ऐसे समय में जब साहित्यिक संवाद अक्सर साहित्यिक गलियारों तक सीमित रह जाते थे, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल ने पढ़ने, सुनने और वैचारिक आदान-प्रदान की सहभागी संस्कृति बनाने की कोशिश की और पीढ़ियों, भाषाओं, विषयों और भौगोलिक सीमाओं के पार की आवाज़ों को एक मंच पर लाने का काम किया।
बहुभाषी कार्यक्रमों, अनुवाद-सत्रों, और भारतीय व अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के लेखकों के माध्यम से, फ़ेस्टिवल ने क्षेत्रीय आवाज़ों और साहित्यिक परंपराओं को एक बड़े दर्शक-समूह तक पहुँचाने के रास्ते बनाए हैं, जो इस विश्वास को दर्शाता है कि हर भाषा में ऐसी कहानियाँ, इतिहास और आयाम होते हैं जो व्यापक सांस्कृतिक संवाद को समृद्ध करते हैं। अपनी 20वीं वर्षगांठ के इस पड़ाव के हिस्से के रूप में, फ़ेस्टिवल की यह घोषणा भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में एक साथ जारी की गई है।
विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल" की थीम पर आधारित, 20वां संस्करण निरंतरता और विकास दोनों को प्रतिबिंबित करता है। टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक और जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के निर्माता संजॉय के. रॉय ने कहा बीस वर्षों से, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल इस सहज विश्वास पर कायम रहा है कि किताबों और विचारों में लोगों को साथ लाने की शक्ति होती है।
अपने बीसवें संस्करण में प्रवेश करते समय, हम इस यात्रा का उत्सव मनाते हुए, आगे आने वाले अनगिनत संवादों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल की सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा भारत की आत्मा उसकी साहित्यिक विरासत और भाषाई विविधता में बसती है। यह उचित ही है कि हम अपनी भाषा स्वरमाला शृंखला के माध्यम से अनेक भाषाओं को याद करते हुए अपने ऐतिहासिक 20वें साल का उत्सव मना रहे हैं।
टीमवर्क आर्ट्स की प्रमुख प्रीता सिंह ने कहा बीते दो दशकों में, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल दुनिया के अग्रणी साहित्यिक और सांस्कृतिक मंचों में से एक बनकर उभरा है। फ़ेस्टिवल किताबों, विचारों और सार्थक संवाद की शक्ति में अपने भरोसे के साथ खड़ा रहा है। यह यात्रा न केवल असाधारण लेखकों और दर्शकों से संभव हुई है, बल्कि हमारे उन साझेदारों, प्रायोजकों और संस्थानों के सहयोग से भी संभव हुई है जो संस्कृति की परिवर्तनकारी भूमिका में हमारे विश्वास के साझीदार हैं।
इस ऐतिहासिक 20वें संस्करण का उद्देश्य साझा सहयोग, नए दर्शकों तक पहुँचने के साथ ही भारत और दुनियाभर में एक सहज सांस्कृतिक हस्तक्षेप करना है। हमारा दृष्टिकोण उन साझेदारियों को बढ़ावा देना है जो साहित्य, विचारों और सार्वजनिक विमर्श का समर्थन करती हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि फ़ेस्टिवल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वतंत्र, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रासंगिक मंच बना रहे। राजस्थान सरकार के सहयोग से, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल का 20वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर में आयोजित होगा।
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