रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भगवान श्री जगन्नाथ की 59वीं रथ यात्रा में सम्मिलित हुए
० योगेश भट्ट ०
नयी दिल्ली : दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न भागों से हजारों श्रद्धालु श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर में आयोजित भगवान श्री जगन्नाथ की 59वीं रथ यात्रा में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में श्री जगन्नाथ संस्कृति द्वारा मानवता, सामाजिक समरसता एवं विश्व बंधुत्व के मूल्यों को बढ़ावा देने की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर दक्षिण दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज तथा विधायक नीरज बसोया भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी समारोह में भाग लेते हुए सभी श्रद्धालुओं को रथ यात्रा की शुभकामनाएँ एवं बधाई दी। इस वर्ष की रथ यात्रा का प्रमुख आकर्षण भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के लिए पुरी की पावन परंपरा के अनुरूप नंदीघोष, तलध्वज एवं देवदलन नामक तीन पृथक रथों का प्रथम बार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में परिचालन रहा।
यह ऐतिहासिक पहल पहली बार दिल्ली-एनसीआर में देखने को मिली। महिला सशक्तिकरण एवं लैंगिक समानता का संदेश देने के उद्देश्य से देवी सुभद्रा के देवदलन रथ को केवल महिला श्रद्धालुओं द्वारा खींचा गया, जिसने इस वर्ष की रथ यात्रा को विशेष रूप से यादगार बना दिया। पारंपरिक पाहंडी बीजे अनुष्ठान के अंतर्गत महाप्रभु को गर्भगृह से विधिवत बाहर लाया गया तथा उन्हें श्री जगन्नाथ मार्ग (बड़दांडा) पर उनके-अपने रथों पर विराजमान किया गया।
मंदिर के नामित गजपति सुधाकर मोहापात्र ( पूर्व निदेशक, ऑयल इंडिया लिमिटेड ) द्वारा पवित्र छेरा पहंरा अनुष्ठान सम्पन्न किया गया। इसके उपरांत त्यागराज स्टेडियम के मुख्य द्वार से रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा श्री जगन्नाथ मार्ग, विकास सदन चौराहा, आईएनए मार्केट सर्विस लेन, श्री अरविंदो मार्ग के समानांतर मार्ग, आईएनए मेट्रो स्टेशन (पिंक लाइन), राज्यसभा कर्मचारी आवासीय परिसर होते हुए श्री गुंडिचा मंदिर पहुँची, जहाँ भगवान नौ दिवसीय प्रवास के दौरान विराजमान रहेंगे।
मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएँ की गई थीं। इनमें सुरक्षा प्रबंध, चिकित्सा सहायता, पेयजल की व्यवस्था, गर्म एवं उमस भरे मौसम से राहत हेतु मार्ग पर जल छिड़काव तथा श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क अन्न प्रसाद वितरण शामिल था। रथ यात्रा के दौरान ओडिशा सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा प्रायोजित सांस्कृतिक दलों ने घोड़ा नाच, बाघ नाच तथा पाइका युद्ध नृत्य जैसी पारंपरिक लोक एवं मार्शल कला प्रस्तुतियाँ देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
चिकित्सा आपात स्थितियों से निपटने के लिए डॉक्टरों सहित चार एम्बुलेंस तैनात की गई थीं। इसके अतिरिक्त अग्नि सुरक्षा की समुचित व्यवस्था तथा स्थायी एवं मोबाइल सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से संपूर्ण रथ यात्रा मार्ग पर कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं को पेयजल, शरबत, लस्सी एवं अल्पाहार वितरित कर सेवा कार्य में सहयोग प्रदान किया।
पूरे आयोजन की देखरेख मंदिर प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष डी. एन. साहू, मानद महासचिव के. डी. बिस्वाल तथा संयुक्त सचिव प्रद्युम्न पलई, यश अग्रवाल ने की। समिति के सदस्य प्रणति बिस्वाल, बिजयानंद सामल, अभय पलई, प्रदीप प्रधान, महेंद्र बारिक, ज्ञान रंजन नायक, संभूनाथ अग्रवाल, ख्याति सेगल, बिनायक मुदुली, रमाकांत स्वैन, सरोज बारिक तथा अन्य अनेक सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि मंदिर की एक दशक से अधिक पुरानी परंपरा के अनुसार 17 जुलाई से 27 जुलाई तक 11 दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन सायंकाल रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। दानदाताओं के लिए लकी ड्रा का आयोजन भी किया जाएगा। साथ ही बच्चों में प्रतिभा एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करने हेतु नृत्य, गायन, चित्रकला एवं अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।
रथ यात्रा महोत्सव के दौरान बच्चों एवं महिलाओं के लिए नृत्य, संगीत, चित्रकला तथा भक्ति-आधारित विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। विजेताओं को समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा। प्रतिदिन सायंकाल देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिष्ठित कलाकार एवं सांस्कृतिक दल ओडिसी, कथक, संबलपुरी तथा अन्य शास्त्रीय एवं लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देंगे, जिससे महोत्सव की भव्यता और अधिक बढ़ेगी।
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