होम्योपैथिक विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह : राज्यपाल हरिभाऊ बागडे द्वारा 760 विद्यार्थियों को डिग्री वितरित
० आशा पटेल ०
जयपुर। बी.एम. बिरला ऑडिटोरियम, जयपुर में आयोजित होम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पीएच.डी. (होम्योपैथी) ,एमडी (होम्योपैथी),बी.एच.एम. एस के 760 विद्यार्थियों को डिग्री वितरित की गई। इस अवसर पर होम्योपैथिक विश्वविद्यालय के संरक्षक एवं सलाहकार डॉ. अमर सिंह शेखावत ने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए संस्थापक डॉ. गिरेन्द्र पाल के अथक योगदान को स्मरण किया।
इस अवसर पर डॉक्टर के सी भिण्डा एवं डॉ अमर सिंह शेखावत को होम्योपैथी चिकित्सा,शिक्षा, अनुसंधान एवं समाज सेवा सेवा के लिए राज्यपाल एवं केंद्रीय केंद्रीय आयुष मंत्री के द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2026 प्रदान किया। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष एवं विशेष अतिथि डा. तारकेश्वर जैन ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा की जा रही विभिन्न प्रक्रियाओं एवं सुधारों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. ए. एन. माथुर ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
जयपुर। बी.एम. बिरला ऑडिटोरियम, जयपुर में आयोजित होम्योपैथी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पीएच.डी. (होम्योपैथी) ,एमडी (होम्योपैथी),बी.एच.एम. एस के 760 विद्यार्थियों को डिग्री वितरित की गई। इस अवसर पर होम्योपैथिक विश्वविद्यालय के संरक्षक एवं सलाहकार डॉ. अमर सिंह शेखावत ने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए संस्थापक डॉ. गिरेन्द्र पाल के अथक योगदान को स्मरण किया।
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि दीक्षांत का अर्थ शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान, सेवा और उत्तरदायित्व के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि राजस्थान शिक्षा, अनुसंधान एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। राज्यपाल ने होम्योपैथी में नवीन अनुसंधान तथा इसके व्यापक विस्तार पर बल दिया।
होम्योपैथी विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. मनोज राजोरिया ने कहा कि राजस्थान में होम्योपैथी शिक्षा का वर्तमान स्वरूप विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. गिरेन्द्र पाल के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने राज्यपाल एवं केंद्रीय आयुष मंत्री से राजस्थान को होम्योपैथी के क्षेत्र में उसका उचित अधिकार दिलाने की मांग करते हुए कहा कि आयुष क्षेत्र में होम्योपैथी को उसका 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
आज जिन्होंने उपाधि प्राप्त की है उनको केंद्रीय आयुष मंत्री ने सलाह दी कि वह समर्पित होकर विशुद्ध होम्योपैथी चिकित्सा के द्वारा रोगी मानवता को अधिक से अधिक सेवा देते हुए ग्रामीण क्षेत्र में जाकर इस पद्धति के द्वारा रोगियों को लाभान्वित करें। समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने कहा कि होम्योपैथी आज दुनिया की सर्वाधिक स्वीकार्य चिकित्सा पद्धतियों में शामिल है।
उन्होंने युवा होम्योपैथिक चिकित्सकों से अनुसंधान को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने तथा देश के स्वास्थ्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में पहचान केवल डिग्री से नहीं, बल्कि ज्ञान, व्यवहार और कार्य संस्कृति से बनती है। विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. के.सी. भिण्डा ने विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति, शैक्षणिक उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉक्टर के सी भिण्डा एवं डॉ अमर सिंह शेखावत को होम्योपैथी चिकित्सा,शिक्षा, अनुसंधान एवं समाज सेवा सेवा के लिए राज्यपाल एवं केंद्रीय केंद्रीय आयुष मंत्री के द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2026 प्रदान किया। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष एवं विशेष अतिथि डा. तारकेश्वर जैन ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा की जा रही विभिन्न प्रक्रियाओं एवं सुधारों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. ए. एन. माथुर ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
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