मानसरोवर स्थित एनआईएफ़ ग्लोबल जयपुर की प्रदर्शनी ‘मार्मिक’ का उद्घाटन

० आशा पटेल ० 
जयपुर। प्रकृति का महत्व, उसका विकराल रूप और आम जीवन में पड़ने वाले प्रभाव को कला और डिज़ाइन के रूप से स्टूडेंट्स ने दर्शाया। मौक़ा था पोद्दार इंस्टिट्यूट के मानसरोवर स्थित एनआईएफ़ ग्लोबल जयपुर के वार्षिक डिज़ाइन प्रदर्शनी ‘मार्मिक - डिज़ाइन बिफोर वी डिसअपीयर’ का। इस पांच दिवसीय प्रदर्शनी 26 जुलाई तक सभी शहर के आर्ट-डिज़ाइन लवर्स के लिए खुली रहेगी।
उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि राजीविका (आरजीएवीपी), राज्य मिशन निदेशक प्रियंका गोस्वामी, पूर्व पुलिस महानिदेशक आईपीएस (सेवानिवृत्त) डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा, राजीविका (आरजीएवीपी), राज्य परियोजना प्रबंधक डॉ. रमणिका कौर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर डिज़ाइन की मानद सचिव आर्किटेक्ट अंशुमान शर्मा सहित चेयरपर्सन कमला पोद्दार, डायरेक्टर अभिषेक पोद्दार और रोमा पोद्दार व अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। प्रदर्शनी में राजीविका सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के कार्यों को भी स्थान दिया गया। जिससे उनके उत्पादों और शिल्प कौशल को सार्थक मंच मिला।
प्रदर्शनी के दौरान फैशन डिज़ाइन और इंटीरियर डिज़ाइन के स्टूडेंट्स ने डिज़ाइन, आर्ट, विरासत, पर्यावरण, स्थिरता और ज़िम्मेदार जीवनशैली को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। इस वर्ष की थीम ‘डिज़ाइन बीफ़ोर वी डिसअपीयर’ के द्वारा स्टूडेंट्स के मनोभावों को कलात्मक आज़ादी दी। जिसको प्रदर्शित करते हुए स्टूडेंट्स ने डिज़ाइन को केवल सुंदरता या सजावट से बढ़ाकर जीवन का दर्पण बनाया।
प्रदर्शनी में स्टूडेंट्स ने स्टाइलिश परिधान, उत्पाद, कलात्मक इंस्टॉलेशन, इंटीरियर डिज़ाइन और आकर्षक विज़ुअल डिस्प्ले को प्राकृतिक रंगों के प्रयोग के साथ डिस्प्ले किया। जिसमें मेहंदी, हल्दी, जामुन, बील, अनार, चुकंदर, गुलाब, मंजिष्ठा और कई पौधों से प्राप्त सामग्रियों से रंग तैयार किए और उन्हें अपने डिज़ाइन कार्यों में उपयोग किया। इसके साथ ही कपड़ों में सुगंध जोड़ने के लिए इत्र के प्रयोग को भी नए रूप में प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने बांस, केले के रेशे, कैक्टस और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से बनी सामग्रियों पर भी रचनात्मक प्रयोग किए।
कलाकृतियों और डिज़ाइन प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदूषण, कचरा, जलवायु परिवर्तन और गैर-जिम्मेदार उपभोग जैसे विषयों पर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण ‘आरग्लास इंस्टोलेशन’ रहा।इसके ऊपरी भाग में जीवित पौधे आशा, विकास और उस भविष्य का प्रतीक थे जिसे अभी भी बचाया जा सकता है, जबकि निचले भाग में खुदाई मशीन, मलबा और सूखी टहनियां पर्यावरणीय विनाश को दर्शा रही थीं।

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