बीआरएमजीएसयू का रोडमैप-लाखों माल गोदाम श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का लक्ष्य
० योगेश भट्ट ०
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के माल गोदाम (गुड्स शेड) श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक रोजगार और समग्र कल्याण की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक यूनियन (बीआरएमजीएसयू) ने एक राष्ट्रीय रोडमैप की घोषणा की है। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल श्रमिकों की समस्याएं उठाना नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं, विधिक सहायता और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराकर एक सशक्त एवं संगठित श्रमिक व्यवस्था विकसित करना है। बीआरएमजीएसयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष परिमल कांति मंडल ने कहा कि नई श्रम संहिताओं और सामाजिक सुरक्षा के विस्तार ने असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि इन श्रमिक हितैषी पहलों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में ट्रेड यूनियनों की महत्वपूर्ण भूमिका है और बीआरएमजीएसयू इसी दिशा में कार्य कर रहा है।
मंडल ने बताया कि भारतीय रेलवे के विभिन्न माल गोदामों में लाखों श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब दो लाख श्रमिकों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जा चुका है। प्रथम चरण के पात्र श्रमिकों की सूची संबंधित सरकारी विभागों को सौंप दी गई है तथा नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारी औपचारिकताएं समय पर पूरी होने पर अनेक श्रमिकों को दुर्गा पूजा से पहले नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र मिल सकेंगे।उन्होंने कहा "हमारा उद्देश्य केवल ट्रेड यूनियन चलाना नहीं, बल्कि ऐसा राष्ट्रीय श्रमिक आंदोलन खड़ा करना है जो प्रत्येक माल गोदाम श्रमिक और उसके परिवार को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, विधिक सहायता तथा सम्मानजनक जीवन से जोड़े। मंडल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो तथा ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी) के महासचिव एस.पी. तिवारी के सहयोग की भी सराहना की।
महासचिव इंदु शेखर चक्रवर्ती, राष्ट्रीय संयोजक काशीनाथ गायेन, विश्वजीत घोष सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय संयोजक काशीनाथ गायेन ने बताया कि देशभर में राज्य, जोनल, मंडल और शाखा समितियों का गठन किया जाएगा तथा प्रत्येक गुड्स शेड में वर्कर हेल्प डेस्क स्थापित होंगे। इनके माध्यम से ईपीएफ, ईएसआईसी, ई-श्रम, नियुक्ति पत्र, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य जांच, टेलीमेडिसिन, छात्रवृत्ति, कौशल उन्नयन और रोजगार सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
राष्ट्रीय महासचिव इंदु शेखर चक्रवर्ती ने बताया कि प्रथम चरण में नई श्रम संहिताओं, श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा, निर्धारित वेतन, औद्योगिक अनुशासन, ऑटोमेशन और कौशल विकास पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। वहीं विश्वजीत घोष ने जानकारी दी कि संगठन के प्रतिनिधि वर्तमान में वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान में मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के माल गोदाम (गुड्स शेड) श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक रोजगार और समग्र कल्याण की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक यूनियन (बीआरएमजीएसयू) ने एक राष्ट्रीय रोडमैप की घोषणा की है। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल श्रमिकों की समस्याएं उठाना नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं, विधिक सहायता और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराकर एक सशक्त एवं संगठित श्रमिक व्यवस्था विकसित करना है। बीआरएमजीएसयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष परिमल कांति मंडल ने कहा कि नई श्रम संहिताओं और सामाजिक सुरक्षा के विस्तार ने असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि इन श्रमिक हितैषी पहलों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में ट्रेड यूनियनों की महत्वपूर्ण भूमिका है और बीआरएमजीएसयू इसी दिशा में कार्य कर रहा है।
मंडल ने बताया कि भारतीय रेलवे के विभिन्न माल गोदामों में लाखों श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब दो लाख श्रमिकों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जा चुका है। प्रथम चरण के पात्र श्रमिकों की सूची संबंधित सरकारी विभागों को सौंप दी गई है तथा नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारी औपचारिकताएं समय पर पूरी होने पर अनेक श्रमिकों को दुर्गा पूजा से पहले नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र मिल सकेंगे।उन्होंने कहा "हमारा उद्देश्य केवल ट्रेड यूनियन चलाना नहीं, बल्कि ऐसा राष्ट्रीय श्रमिक आंदोलन खड़ा करना है जो प्रत्येक माल गोदाम श्रमिक और उसके परिवार को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, विधिक सहायता तथा सम्मानजनक जीवन से जोड़े। मंडल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो तथा ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी) के महासचिव एस.पी. तिवारी के सहयोग की भी सराहना की।
महासचिव इंदु शेखर चक्रवर्ती, राष्ट्रीय संयोजक काशीनाथ गायेन, विश्वजीत घोष सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय संयोजक काशीनाथ गायेन ने बताया कि देशभर में राज्य, जोनल, मंडल और शाखा समितियों का गठन किया जाएगा तथा प्रत्येक गुड्स शेड में वर्कर हेल्प डेस्क स्थापित होंगे। इनके माध्यम से ईपीएफ, ईएसआईसी, ई-श्रम, नियुक्ति पत्र, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य जांच, टेलीमेडिसिन, छात्रवृत्ति, कौशल उन्नयन और रोजगार सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
राष्ट्रीय महासचिव इंदु शेखर चक्रवर्ती ने बताया कि प्रथम चरण में नई श्रम संहिताओं, श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा, निर्धारित वेतन, औद्योगिक अनुशासन, ऑटोमेशन और कौशल विकास पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। वहीं विश्वजीत घोष ने जानकारी दी कि संगठन के प्रतिनिधि वर्तमान में वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान में मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
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