राजस्थान बनेगा देश में 'क्रिटिकल मिनरल्स' और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) का नया हब-दिग्विजय ढाबरिया

० आशा पटेल ० 
जयपुर। देश की आर्थिक प्रगति और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से, PHDCCI-राजस्थान चैप्टर द्वारा जयपुर के पीएचडी हाउस में '4थ राजस्थान माइनिंग समिट' का आयोजन किया गया। इस शिखर सम्मेलन का विषय “जियोपॉलिटिक्स, मिनरल सिक्योरिटी एंड राजस्थान’स अपॉर्चुनिटी इन क्रिटिकल मिनरल्स विद एम्फैसिस ऑन आरईई (REE)” रखा गया।
PHDCCI-राजस्थान चैप्टर के चेयरमैन दिग्विजय ढाबरिया ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) में आ रहे बदलावों का हवाला देते हुए कहा कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में खनिज सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है।
ढाबरिया ने बताया कि राजस्थान में 83.50 मिलियन टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) के भंडार के पदचिह्न (footprints) मिले हैं। इस विशाल संपदा के साथ राजस्थान भारत के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी खनन से लेकर बाजार (Mine to Market) तक का एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने के लिए सक्रिय नीतियां लागू कर रही है।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के पश्चिमी क्षेत्र के उप महानिदेशक विशाल वसंतराव साखरे ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि GSI रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्रों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स और REEs के नए ब्लॉकों की खोज में आक्रामक रूप से काम कर रहा है।

उन्होंने खुलासा किया कि पश्चिमी राजस्थान का 'सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स' रणनीतिक खनिजों का एक बड़ा पावरहाउस बनने जा रहा है। देश के लगभग सभी प्रमुख माइनिंग घराने इस क्षेत्र में अन्वेषण और निष्कर्षण (extraction) के लिए रुचि दिखा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी मात्रा में पेगमाटाइट चट्टानों की उपलब्धता है और आने वाले समय में राजस्थान में ग्रेफाइट के विशाल भंडार मिलने की भी प्रबल संभावना है।

फेडरेशन ऑफ माइनिंग एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (FMAR) के मानद महासचिव अक्षय दीप माथुर ने बताया कि वैसे तो क्रिटिकल मिनरल्स पर ध्यान साल 2011 से ही शुरू हो गया था, लेकिन कोविड और हालिया भू-राजनीतिक तनावों के बाद यह राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि राजस्थान में चल रही 3,000 से अधिक मौजूदा खदानों के कचरे (tailings) और मलबे में इन रणनीतिक खनिजों के अंश मौजूद हैं।

 यदि खदान मालिकों को इन्हें पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया जाए और प्रोसेसिंग प्लांट तक सप्लाई की चेन बनाई जाए, तो उत्पादन में भारी उछाल आ सकता है। उन्होंने खान मंत्रालय द्वारा शुरू किए जा रहे 'नेशनल मिनरल एक्सचेंज' के फैसले की भी सराहना की।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी FCI अरावली जिप्सम एंड मिनरल्स इंडिया लिमिटेड (FAGMIL) के सीएमडी प्रसांत कुमार दास ने बताया कि उनकी कंपनी सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में क्रिटिकल मिनरल्स की खोज में सक्रिय रूप से उतर चुकी है। उन्होंने जानकारी दी कि FAGMIL ने राजस्थान में REEs और क्रिटिकल मिनरल्स पर एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' भी स्थापित किया है जो इस क्षेत्र में अनुसंधान (R&D) को बढ़ावा देगा।

थीम एड्रेस देते हुए पूर्व अतिरिक्त निदेशक (DMG, राजस्थान) और डीपसार मिनरल एक्सप्लोरर के निदेशक प्रदीप अग्रवाल ने राज्य के भीतर ही वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) करने के लिए 'माइन टू मार्केट / मेटल' की अवधारणा को तुरंत लागू करने की आवश्यकता जताई। सम्मेलन के दौरान तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनका संचालन प्रदीप अग्रवाल और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) के सीनियर प्रोग्राम लीड अभिनव सेनगुप्ता ने किया।

 इसमें टीम जियो रिसोर्सेज के अध्यक्ष के. वासुदेवन, आईबीएम के पूर्व अधिकारी बी एल कोटरीवाला, क्रिटिकल मिनरल एसोसिएशन के संस्थापक संदीप हैमिल्टन (वर्चुअल), और फ्यूलबडी के सीईओ सुनील मदाला सहित कई दिग्गजों ने अपने विचार रखे। सुनील मदाला ने आधुनिक खनन कार्यों के लिए कुशल ईंधन प्रबंधन तकनीकों पर एक प्रस्तुति भी दी।

इस अवसर पर मैसर्स डीपसार मिनरल एक्सप्लोरर द्वारा तैयार की गई एक विशेष 'नॉलेज रिपोर्ट ऑन क्रिटिकल मिनरल्स एंड REEs इन राजस्थान' का विमोचन भी किया गया, जो राज्य में रणनीतिक खनिजों के भविष्य का रोडमैप दर्शाती है। कार्यक्रम का संचालन PHDCCI-राजस्थान चैप्टर के रेजिडेंट डायरेक्टर आर के गुप्ता द्वारा किया गया।

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