राजस्थान नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने भाजपा सरकार को आईना दिखाने का काम किया

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर। राजस्थान नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने भाजपा की सरकार को आईना दिखाने का काम किया है, क्योंकि नगर निकाय चुनावों में हमेशा से भाजपा को बढ़त लेने वाला माना जाता है और सरकार होने के कारण भी लाभ की स्थिति शासन करने वालों की मानी जाती है। 2014-2016 में प्रदेश में भाजपा की वसुंधरा सरकार थी तो वोट शेयर में भाजपा की बढ़त 8.12 प्रतिशत थी, 2019-2021 के मध्य कांग्रेस की गहलोत सरकार के समय कांग्रेस की भाजपा पर बढ़त 2.2 प्रतिशत थी, 
इस चुनाव में परिणामों से परिलक्षित हुआ है कि भाजपा की कांग्रेस पर बढ़त 1 प्रतिशत से भी कम रह गई है, जबकि स्थानीय निकाय के चुनाव में लोगों को सरकार से आशा होती है कि काम कराने में आसानी रहेगी, किन्तु इन चुनावों में उल्टा हो गया और भाजपा को जनता ने नकार दिया है। भाजपा और कांग्रेस को मिले वोटों की गणना अगर भाजपा द्वारा बेईमानीपूर्वक किये गये परिसीमन को अलग रखकर देखी जाये तो कांग्रेस पार्टी भाजपा के मुकाबले 1500 वार्ड अधिक जीतकर आती।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों में इन 188 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का वोट शेयर 42.41 प्रतिशत था जो लोकसभा में बढक़र 50.14 हो गया, किन्तु इन चुनावों में भाजपा सरकार के कुशासन के कारण वोट प्रतिशत गिरकर 35.3 प्रतिशत रह गया, इससे बड़ा गिरावट का उदाहरण देश में आज तक नहीं देखा गया है।
जिस प्रकार भाजपा का दलित समाज के प्रति विरोधी रवैया रहा है उसका परिणाम है कि अनुसूचित जाति आरक्षित वार्डों में कांग्रेेस ने 542 वार्ड जीते हैं जबकि भाजपा ने मात्र 350 वार्ड पर ही जीत दर्ज की है, इस प्रकार कांग्रेस की बढ़त इन आरक्षित वार्डों में 192 की रही। एससी महिला आरक्षित वार्ड में कांग्रेस ने 261 वार्ड जीते हैं जबकि भाजपा मात्र 186 ही जीत सकी, इसमें कांग्रेस की 75 सीटों की बढ़त है। एसटी महिला आरक्षित वार्ड में कांग्रेस ने 53 वार्ड जीते हैं जबकि भाजपा मात्र 39 ही जीत सकी है,

 क्योंकि भाजपा द्वारा लगातार संविधान और आरक्षण के विरोध की बातें कही गई, साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े के साथ जो उत्तराखण्ड में अपमानजनक व्यवहार किया गया, उनकी सभा के पश्चात् कार्यक्रम स्थल पर शुद्धीकरण की बात कही गई उसका जवाब दलित समाज ने भाजपा को हराकर और कांग्रेस के पक्ष में मतदान करके दिया है। भाजपा की सरकार ने बेतरतीब और नियम विरूद्ध परिसीमन किया, कहीं 4 हजार का वार्ड है तो कहीं 35 हजार मतदाताओं का वार्ड है, छोटे निकायों मेें कहीं 600 का वार्ड है तो वहॉं 3000 का भी वार्ड है, 

इसका परिणाम यह हुआ कि 4097 भाजपा द्वारा जीते गये वार्ड में 1316 वार्डों में जीत का अंतर 100 वोटों से भी कम है, 772 वार्डों में भाजपा की जीत का अंतर 50 से कम वोटों से है। इसी प्रकार 13 वार्डों में भाजपा 1 वोट से जीत दर्ज कर सकी है, जो सिर्फ और सिर्फ बेईमानीपूर्वक किये गये नियम विरूद्ध परिसीमन के कारण है अन्यथा भाजपा इन सभी वार्डों में निश्चित रूप से चुनाव हारती। 1316 वार्डों में कांग्रेस पार्टी ने पुर्नमतगणना की अर्जी थी, 

किन्तु जिन वार्डों में कांग्रेस के प्रत्याशी 200-300 वोटों के अंतर से आगे थे उनके परिणामों को जबरन रोके रखा, ताकि भाजपा के पक्ष में और मुख्यमंत्री के लिये माहौल बनाया जा सके, किन्तु मतदाताओं ने बता दिया कि भाजपा और मुख्यमंत्री की प्रदेश में कोई लोकप्रियता नहीं है।

 डोटासरा ने कहा कि अजमेर शहर से विधानसभा स्पीकर और भाजपा की वरिष्ठ नेता अनिता भदेल जीतकर आती हैं, वहॉं 80 में से 37 वार्डों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है, भाजपा केवल 32 पर जीती है, बहुमत कांग्रेस को मिला। इसी प्रकार भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के क्षेत्र पाली से जहॉं बरसों से कांग्रेस नहीं जीती, वहॉं 65 में से 29 वार्ड कांग्रेस ने जीती हैं और भाजपा 21 पर सिमट गई है, बहुमत कांग्रेस के पास है। बीकानेर में बरसों के बाद कांग्रेस का बोर्ड बनने जा रहा है, यहॉं पर 80 में से 42 वार्ड कांग्रेस पार्टी ने जीते हैं,

 इसी क्षेत्र से केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी चुने जाते हैं, उनकी पूरी कवायद के बावजूद भाजपा बुरी तरह से हार गई है। जोधुपर में भाजपा बहुमत नहीं जुटा पाई और कांग्रेस ने एक वार्ड अधिक जीता है, कांग्रेस पार्टी ने 45 वार्ड पर जीत दर्ज की है, कांग्रेस के वोट 42.7 प्रतिशत आये हैं और भाजपा के वोट 39.8 प्रतिशत ही है। इसी तरह जयपुर के चुनाव में भाजपा ने प्रशासन का पूरा दुरूपयोग किया किन्तु परिणाम जो आये हैं उसके अनुसार कांग्रेस पार्टी को भाजपा के मुकाबले 10 हजार से अधिक वोट जयपुरवासियों ने दिये हैं, 

यह परिस्थिति इसलिये है कि भाजपा ने बेईमानीपूर्वक वार्डों का मनमाना परिसीमन किया, यहॉं वार्ड संख्या 31 में 13499 मतदाता है और वार्ड 135 में 32272 मतदाता हैं, नियमानुसार वार्डों के परिसीमन के समय मतदाताओं की संख्या को वेरीयेशन 10 से 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिये। वोट ज्यादा कांग्रेस के आये, किन्तु वार्ड भाजपा ने ज्यादा जयपुर में जीते, यह सब इस बेईमानीपूर्वक किये गये परिसीमन का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने पाली में वार्ड संख्या 31, 32 और 34 में रोड शो किया था किन्तु तीनों ही वार्डों में भाजपा बुरी तरह से हार गई है। भरतपुर जो मुख्यमंत्री का गृह जिला है, 65 में से केवल 20 वार्ड भाजपा जीत सकी है। सांगानेर में कांग्रेस का वोट शेयर 38.8 प्रतिशत है और भाजपा को मात्र 35.9 प्रतिशत वोट मिले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र झालावाड़ में 8 नगर निकाय हैं जिसमें से भाजपा का 5 में सफाया हो गया है और कांग्रेस के वोट शेयर में 4.9 प्रतिशत की बढ़त है।

 जयपुर की पूर्व महापौर जो लोकसभा का चुनाव भी लड़ी थी, कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल होने के बाद वार्ड का चुनाव भी बुरी तरह हार गई है। भाजपा के मंत्री ओटाराम देवासी, गौतम दत्त, विजय सिंह, डॉ. मंजू बाघमार इन सबके क्षेत्रों में कांग्रेस जीती है। शेखावाटी सीकर, झुन्झुनूं, बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू सहित अनेक जिलों में कांग्रेस का दबदबा कायम रहा है और भाजपा की हालत पतली हो गई है। 

जहॉं भाजपा बहुत कम मतों के अंतर से वार्डों में चुनाव जीती है, जयपुर के वार्ड 126 में कांग्रेस पार्टी 7153, वार्ड 125 में 6704, 129 में 5355, 116 में 5310, कोटा में वार्ड 13 में 3807, बीकानेर में वार्ड 55 में 2957 के बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री 10 नगर निगमों में रोड शो करने गये थे किन्तु बहुमत 4 नगर निगम में ही मिल पाया है। ढाई साल से सरकार ने जनता के हित में कोई कार्य नहीं किया,

 जिसका परिणाम है और आने वाले समय में जब पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होंगे तो भाजपा बुरी तरह चुनाव हारेगी। शहरी निकायों में जिसे भाजपा और आरएसएस अपना गढ़ मानते हैं, वहॉं चुनाव जीत नहीं पाये और अब आने वाले समय में जब पंचायत चुनाव होंगे तो भाजपा सरकार की पोल खुल जायेगी और बुरी तरह से चुनाव में भाजपा हार का सामना करेगी।

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