कॉमन वेल्थ पीस मिडिएशन एंड रूल्स ऑफ ला कॉन्फ्रेंस में जुटे देश भर के न्यायमूर्ति

० आशा पटेल ० 
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता में आयोजित कॉमनवेल्थ शांति मध्यस्थता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ शांति मध्यस्थता अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नई सोच, नई दिशा, नए वैश्विक दृष्टिकोण की शुरुआत साबित होगा।
सम्मेलन में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, जाम्बिया के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश, अटॉर्नी जनरल, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, सॉलिसिटर जनरल एवं न्यायविद उपस्थित रहे।
प्रधान न्यायाधीश( सीजेआइ) सूर्यकांत ने कहा कि जब कोई वकील नहीं होता था और विवाद होते थे, तब पंचायतें मध्यस्थता से विवादों को हल करती थीं। आज हम वैश्विक शांति की बात करते हैं, जहां देशों की सीमाओं से आगे देखते हैं। चाहे दो पड़ोसियों में छोटा झगड़ा हो या दो देशों के बीच युद्ध, विवाद सुलझाने का तरीका लगभग एक जैसा रहता है। बोलने से ज्यादा सुनना पड़ता है।
साथ ही विश्वास रखना पड़ता है कि दोनों पक्ष मिलकर बेहतर जीवन का रास्ता निकाल सकते हैं। कानूनी पेशे में यह सबसे कठिन स्किल है और इसके लिए ट्रेनिंग और अनुभव से लगातार सीखने की जरूरत होती है।सीजेआइ सूर्यकांत ने कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल्स ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर यह बात कही। 
इस समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश विजय बिश्नोई, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता, जाम्बिया के सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश आभा पटेल भी उपस्थित थीं |

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में मध्यस्थता केवल विकल्प नहीं, आवश्यकता बन चुकी है। आज न्यायालय में लंबित मुकदमों से जब व्यक्ति की संपति, समय और पैसा सब छिन जाता है। सालों साल अदालतों के चक्कर काटने पर भी जो विवाद नहीं सुलझते, मध्यस्थता से उनका समाधान निकलता है और वह स्थायी और लंबे समय के लिए होता है। हमारे यहां सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का काम पंचायतें करती आई हैं। वह केवल विवाद ही नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट को भी खत्म करती थीं।

इस अवसर पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि हमारे यहां मध्यस्थता का सबसे बड़ा उदाहरण पंच परमेश्वर परंपरा रही है। इसी परंपरा से भारत मध्यस्थता के अंतराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा है। एआइ, ब्लॉकचेन आदि से कानूनी चुनौतियां बढ़ी हैं। जटिल विवादों के लिए आधुनिक और प्रभावी समाधान की जरूरत है।

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