रामजी लाल स्वर्णकार की 23वीं पुण्य तिथि पर हुआ ‘समुद्र मंथन’ का मंचन

० आशा पटेल ० 
जयपुर। 
श्री रामजी लाल स्वर्णकार की 23वीं पुण्य तिथि के अवसर पर महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, जयपुर के आर.एल. स्वर्णकार ऑडिटोरियम में स्मृति समारोह आयोजित किया गया। समारोह में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की रेपर्टरी कंपनी द्वारा हिन्दी नाटक ‘समुद्र मंथन’ का मंचन किया गया।
समारोह की शुरुआत श्री रामजी लाल स्वर्णकार एवं श्रीमती गोमती देवी स्वर्णकार के चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन करने के साथ हुई। इस अवसर पर परिवारजनों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिकारियों, चिकित्सकों, न्यायिक एवं प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े अतिथियों तथा कला जगत की हस्तियों ने उनकी स्मृतियों को साझा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी के संस्थापक चेयरमैन डॉ एम एल स्वर्णकार ने कहा कि माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कार नई पीढ़ी के आचरण का हिस्सा बन जाये यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होती है। उन्होंने कहा कि श्री रामजी लाल स्वर्णकार की 23वीं पुण्य स्मृति पर कला और संस्कृति को समर्पित यह विशेष प्रस्तुति उनके मूल्यों एवं विरासत को स्मरण करने का माध्यम है।

प्रसिद्ध रंगकर्मी, निर्देशक एवं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी के निर्देशन में प्रस्तुत ‘समुद्र मंथन’ ने दर्शकों को पौराणिक कथा के साथ समकालीन जीवन के अनेक महत्वपूर्ण प्रश्नों से भी रूबरू कराया। नाटक में देवासुर संग्राम, अमृत की खोज और हलाहल विष की कथा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए विकास, विज्ञान, तकनीक और समृद्धि के साथ उत्पन्न होने वाले प्रदूषण, तनाव, असंतुलन और सामाजिक चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

प्रस्तुति का मूल संदेश यह रहा कि समुद्र मंथन केवल समुद्र से अमृत प्राप्त करने की पौराणिक कथा नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले निरंतर आत्ममंथन का भी प्रतीक है। इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं, कमजोरियों और संवेदनाओं के बीच होने वाले इस आंतरिक मंथन से अमृत के साथ विष भी निकलता है और उस विष को धारण करने की जिम्मेदारी भी मनुष्य की ही होती है।

लेखक आसिफ अली हैदर की रचना को निर्देशक चित्तरंजन त्रिपाठी, राजेश सिंह, सुंदर लाल छाबड़ा, अरुण मलिक, ज्ञानदेव सिंह, संतोष कुमार सैनी, अभिषेक मुद्गल सहित पूरी रंगमंचीय टीम ने ऑडियो विजुअल के जरिए भव्य रूप प्रदान किया। इस प्रस्तुति में 100 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

समारोह में चेयरपर्सन डॉ विकास चन्द्र स्वर्णकार, श्रीमती मीना स्वर्णकार, हरमन स्वर्णकार, आर आर सोनी, वंदना सोनी, डॉ शोभित स्वर्णकार, जयाश्री, डॉ अचल गुलाटी, डॉ प्रदीप पाइन, डॉ सुधीर सचदेव सहित स्वर्णकार परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में प्रशासनिक एवं न्यायिक सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, विश्वविद्यालय के पदाधिकारी तथा कला एवं सांस्कृतिक जगत से जुड़ी अनेक हस्तियां भी समारोह में शामिल हुईं।

रामजी लाल स्वर्णकार की पुण्य स्मृति को कला और संस्कृति के माध्यम से समर्पित यह आयोजन उनकी स्मृतियों को नमन करने के साथ परिवार के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बना।

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