दुनिया के बड़े-बड़े ब्रांड देश के बुनकरों से मिला रहे हाथ - कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
० आशा पटेल ०
जयपुर। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री स्वयं समय-समय पर देश के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए वस्त्र धारण कर इस समृद्ध परंपरा और भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहित करते हैं।कर्नल राठौड़ ने जवाहर कला केंद्र में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हाथ से बने प्रत्येक वस्त्र की अपनी अलग पहचान होती है और उसके प्रत्येक रेशे के साथ एक प्रेरक कहानी जुड़ी होती है। यही कारण है कि आज विश्व के प्रतिष्ठित ब्रांड भी भारतीय बुनकरों के साथ जुड़ रहे हैं।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक हथकरघा वस्त्र पहनें तथा उनके निर्माण की पूरी प्रक्रिया, धागे से लेकर बुनाई और सिलाई तक की कहानी, सोशल मीडिया पर शेयर करें। इससे हथकरघा उत्पादों के प्रति जनजागरूकता बढ़ेगी और स्थानीय बुनकरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा हस्तशिल्प उत्पादों और हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बुनकरों से संवाद भी किया। कार्यक्रम में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, राजस्थान हथकरघा विकास निगम की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्रीमती नम्रता वृष्णि, रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला तथा राजस्थान राज्य बुनकर संघ के प्रबंध निदेशक महावीर प्रसाद मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में बुनकर उपस्थित रहे।इस कार्यक्रम में कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने उत्कृष्ट बुनकरों को राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार प्रदान किए। प्रथम पुरस्कार जालोर जिले के डीगांव निवासी श्री कानाराम को कॉटन एवं सिल्क साड़ी के उत्कृष्ट निर्माण के लिए प्रदान किया गया। द्वितीय पुरस्कार नागौर जिले के टांकला निवासी सोहनराम को कलात्मक दरी निर्माण के लिए तथा तृतीय पुरस्कार झालावाड़ जिले के असनावर निवासी श्रीमती धापूबाई को तोता गागरौनी डबल बेडशीट के उत्कृष्ट निर्माण के लिए प्रदान किया गया।
जयपुर। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री स्वयं समय-समय पर देश के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए वस्त्र धारण कर इस समृद्ध परंपरा और भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहित करते हैं।कर्नल राठौड़ ने जवाहर कला केंद्र में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हाथ से बने प्रत्येक वस्त्र की अपनी अलग पहचान होती है और उसके प्रत्येक रेशे के साथ एक प्रेरक कहानी जुड़ी होती है। यही कारण है कि आज विश्व के प्रतिष्ठित ब्रांड भी भारतीय बुनकरों के साथ जुड़ रहे हैं।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक हथकरघा वस्त्र पहनें तथा उनके निर्माण की पूरी प्रक्रिया, धागे से लेकर बुनाई और सिलाई तक की कहानी, सोशल मीडिया पर शेयर करें। इससे हथकरघा उत्पादों के प्रति जनजागरूकता बढ़ेगी और स्थानीय बुनकरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा हस्तशिल्प उत्पादों और हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बुनकरों से संवाद भी किया। कार्यक्रम में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, राजस्थान हथकरघा विकास निगम की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्रीमती नम्रता वृष्णि, रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला तथा राजस्थान राज्य बुनकर संघ के प्रबंध निदेशक महावीर प्रसाद मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में बुनकर उपस्थित रहे।इस कार्यक्रम में कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने उत्कृष्ट बुनकरों को राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार प्रदान किए। प्रथम पुरस्कार जालोर जिले के डीगांव निवासी श्री कानाराम को कॉटन एवं सिल्क साड़ी के उत्कृष्ट निर्माण के लिए प्रदान किया गया। द्वितीय पुरस्कार नागौर जिले के टांकला निवासी सोहनराम को कलात्मक दरी निर्माण के लिए तथा तृतीय पुरस्कार झालावाड़ जिले के असनावर निवासी श्रीमती धापूबाई को तोता गागरौनी डबल बेडशीट के उत्कृष्ट निर्माण के लिए प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त सांत्वना पुरस्कार जोधपुर जिले के सालावास निवासी दिनेश भोबरिया को पंजा दरी तथा बाड़मेर जिले के इण्डारा निवासी श्रीमती कबू को टेबल कवर के उत्कृष्ट निर्माण के लिए प्रदान कर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर जवाहर कला केंद्र में एक तीन दिवसीय प्रदर्शनी भी लगाई गई है। 9 अगस्त तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में करीब 60 स्टॉल स्थापित की गई हैं।
राज्य के विभिन्न जिलों से आए बुनकर कोटा डोरिया साड़ी, ड्रेस मटेरियल, पंजा दरी, मालानी पट्टू, खेस, हैंडलूम बेडशीट, दुपट्टे, कुशन कवर, गृह सज्जा सामग्री, हैंडलूम शॉल, ऊनी वस्त्र, इंडिगो आधारित हथकरघा वस्त्र तथा साफा एवं पगड़ी के कपड़ों सहित विविध उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय कर रहे हैं। भारत सरकार के बुनकर सेवा केंद्र द्वारा हथकरघा प्रौद्योगिकी पर आधारित आकर्षक थीम पवेलियन तैयार किया गया है।
राजस्थान को भी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर गौरवपूर्ण उपलब्धि मिली। बाड़मेर जिले के सेड़वा क्षेत्र के आलिसरो की बस्ती निवासी युवा बुनकर बरीगा राम को उनकी उत्कृष्ट पट्टू साड़ी बुनाई कला के लिए राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
राजस्थान को भी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर गौरवपूर्ण उपलब्धि मिली। बाड़मेर जिले के सेड़वा क्षेत्र के आलिसरो की बस्ती निवासी युवा बुनकर बरीगा राम को उनकी उत्कृष्ट पट्टू साड़ी बुनाई कला के लिए राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
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