पूरे सिस्टम को मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने हाईजेक कर लिया है : डोटासरा

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर। 
कांग्रेस पार्टी ने निर्णय लिया है कि 28 सितम्बर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा राजधानी में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग के विरूद्ध किया जायेगा और कांग्रेस कार्यकर्ता राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके पश्चात् प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस कार्यकता ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी व पद से हटाये जाने तथा एसआईआर पारदर्शी समीक्षा की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटियों द्वारा प्रदर्शन किये जायेंगे।

केन्द्र में लगातार भाजपा वोट चोरी से सरकार बना रही है, इसी प्रकार देश के विभिन्न राज्यों में देश का जनमत भाजपा के खिलाफ था, किन्तु चुनाव आयोग को अपनी साजिश में शामिल कर भाजपा और उनके नेता अमित शाह ने राज्य में सरकार लूटने का कार्य किया है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गॉंधी ने प्रेस कान्फ्रेंस के माध्यम से सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की थी, एसआईआर में किस प्रकार धांधली और बईमानी कर आम जनता के वोट को लूटा जा रहा है, काटा जा रहा है और मनमर्जी से हटाया जा रहा है, 
यह सभी मनमाने फैसले भाजपा और उनके बड़े नेताओं के ईशारे पर चुनाव आयोग द्वारा किये जा रहे हैं। अब प्रमुख समाचार पत्र में जिस प्रकार चुनाव आयोग की कारगुजारी को उजागर किया गया है, पिछले 10 माह में 14 बार चुनाव आयोग के दो सदस्यों विवेक जोशी और सुखवीर सिंह संधू ने आपत्ति दर्ज करवाई, यह सबके सामने आ चुका है। इन दो सदस्यों ने स्पष्ट रूप से चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने हेतु जारी फार्म 6 में जो बदलाव किये गये, 
मतदाताओं के नाम जोडऩे तथा हटाने के लिये केन्द्रीयकृत व्यवस्था और पश्चिम बंगाल में एसआईआर में नाम काटने के पश्चात् जो नाम पुन: जोड़े गये उनके विरूद्ध अपील करने के आधार और निर्णय लेने के औचित्य तथा निर्णय में शामिल नहीं करने पर आपत्ति दर्ज करवाई है। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये।

डोटासरा ने कहा कि देश के चुनाव की पूरी प्रक्रिया व सिस्टम जिसे पारदर्शी होना चाहिये तथा चुनाव आयोग में तीनों सदस्यों में सर्वसम्मति अथवा बहुमत के आधार पर फैसला होना चाहिये, के विरूद्ध जाकर पूरे सिस्टम को मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने हाईजेक कर लिया है। 1995 में उच्चतम न्यायालय का निर्णय है कि चुनाव आयोग में जो भी निर्णय हो या तो सर्वसम्मति से हो अथवा बहुमत के आधार पर हो, एक व्यक्ति का फैसला नहीं चल सकता है। 

चुनाव आयोग में ज्ञानेश कुमार द्वारा जो गड़बडिय़ा करवाई जा रही हैं, उसमें उन्हें आगे जाकर कोई सजा नहीं हो और कार्यवाही भी नहीं हो, इसके लिये भाजपा की केन्द्र सरकार ने आश्वस्त किया और कानून बना दिया है कि निर्वाचन आयोग के किसी भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी अथवा सदस्यों की निर्वाचन आयोग के कार्यों को लेकर गिरफ्तारी नहीं हो सकती और कोई कार्यवाही नहीं हो सकती, यह कानून उस वक्त बना जब संसद से 143 विपक्षी सांसदों को संसद से निलम्बित किया गया था, यहॉं यह बताया जाना आवश्यक है कि संसद में यह भी कानून बनाया गया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के चयन में चीफ जस्टिस ऑफ इण्डिया को हटाकर गृह मंत्री का नाम जोड़ दिया गया

 ताकि मनमाने तरीके से निर्वाचन आयोग में नियुक्ति की जा सके। ऐसा इसलिये किया गया कि भाजपा की सोच है कि आमजनता के वोट से उन्हें कोई सरोकार नहीं है, पारदर्शी चुनाव से उन्हें कोई सरोकार नहीं है, मनमानी से अपने चुनाव पक्ष में किये जा सकें। चुनाव आयोग के दो सदस्यों द्वारा मुख्य रूप से तीन आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं जिसमें फार्म संख्या 6 में वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने वाले आवेदनकर्ता से यह पूछा गया है कि उसके माता, पिता, दादी का एसआईआर में नाम है अथवा नहीं, यह बदलाव निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं किया जा सकता, इसका क्षेत्राधिकार केवल सरकार को है। दूसरी आपत्ति जो दोनों सदस्यों ने की है वो यह है कि वोट जोडऩा और घटाने का सिस्टम एसडीएम के पास होता है,

 ईआरओ नेट एक्सेस जब से चुनाव चालू हुये हैं, विधानसभा के ईआरओ एसडीएम के पास एक्सेस होता है, किन्तु पहली बार बिना चुनाव के सदस्यों को निर्णय में शामिल किये उनकी जानकारी के बगैर मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने इस पूरे आईटी सिस्टम पर कब्जा कर लिया और ईआरओ से उनका नेट एक्सेस हटा लिया गया। ऐसे सैंकड़ो उदाहरण पूरे देशभर में हर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिले हैं। तीसरी आपत्ति यह है कि भाजपा को पश्चिम बंगाल में चुनाव लूटना था, सत्ता पर काबिज होना था, इसके लिये 38 लाख वोटर्स का विलोपन एसआईआर में किया गया, 23 लाख अपीलों में 90-95 प्रतिशत मतदाता बहाल हो गये 

जो खुद चुनाव आयोग ने बहाल किये गये मतदाताओं के खिलाफ 16 लाख अपीलें दायर कर दी इसकी अनुमति किससे ली गई और दोनों चुनाव आयोग के सदस्यों को इस निर्णय की जानकारी भी नहीं दी गई जिसकी आपत्ति इन्होंने दर्ज करवाई है। जब चुनाव आयोग के मनमाने निर्णयों और नियम विरूद्ध कार्यवाही पर नेता विपक्ष राहुल गॉंधी ने सवाल उठाये तो मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि राहुल गॉंधी जो बात उठा रहे हैं उसका एक शपथ पत्र प्रस्तुत करें, जबकि इन आपत्तियों पर मुख्य चुनाव अधिकारी ने एक लाईन का जवाब दिया है कि यह सहीं नहीं है, किन्तु खुद की ओर से शपथ पत्र क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नेता विपक्ष राहुल गॉंधी तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े के नेतृत्व में यह मॉंग करती है कि मुख्य निवार्चन अधिकारी ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाये और अविलम्ब गिरफ्तार किया जाये, साथ ही जो भी एसआईआर प्रक्रिया इनके कार्यकाल में हुई उसकी समीक्षा पारदर्शितापूर्वक की जाये।

डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में भी अन्य प्रदेशों की तरह ही जनमत लूटने का कार्य भाजपा ने किया है। नगर निकाय के चुनावों में इसी पेटर्न के आधार पर जनता के जनादेश को डारा-धमकाकर, प्रलोभन देकर, प्रशासनिक शक्तियों का दुरूपयोग कर जनमत लूटने का कार्य किया गया है। निकाय चुनावों में वार्डों के परिसीमन में बेईमानी की गई, नियमानुसार एक निकाय के दो वार्डों में 10 से 15 प्रतिशत मतदाताओं के वेरीयेशन की ही अनुमति है किन्तु जोधपुर में एक वार्ड से दूसरे वार्ड के बीच वेरीयेशन 227.7 प्रतिशत है, 

अजमेर में 144.7 प्रतिशत है, जयपुर में 139.1 प्रतिशत है, कोटा में 66.6 प्रतिशत है, भरतपुर में 55.5 प्रतिशत है। जोधपुर में वार्ड संख्या 10 में 4212 मतदाता हैं, वार्ड 87 में 13803 हैं, अजमेर के वार्ड 61 में 3569 मतदाता है, 54 में 8734 है, जयपुर में वार्ड 31 में 13499 हैं, वार्ड 135 में 32272 हैं, कोटा वार्ड 19 में 7801 हैं, वार्ड 41 में 12996 हैं, भरतपुर में वार्ड 58 में 3327 हैं, वार्ड 16 में 5173 मतदाता हैं।

 राजस्थान में भाजपा सरकार ने पुलिस प्रशासन का बेजा इस्तेमाल कर गदर मचाया है, जिसका उदाहरण है कि मात्र 4 दिन में 152 एफआईआर अपहरण की दर्ज की गई है और इनके बाद लोगों को जबरन पुलिस द्वारा उठा-उठाकर भाजपा के फायदे के लिये लोगों को लाया गया। जयपुर जिले में 13 जगह कांग्रेस की बाड़ेबंदी में सरकार ने घुसकर पार्षदों को डराने-धमकाने का कार्य किया, झुन्झुनूं में कांग्रेस की बाड़ाबंदी में दीवार फांदकर मलसीसर में पुलिस घुसी, राजसमन्द में गायब पार्षद ने बताया कि पुलिस ने जंगल में बुलाकर टॉर्चर किया, झालावाड़ में पार्षदों को धनबल का प्रलोभन और धमकियां दी गई,

 नीमराना में पार्षद के जेठ को हिरासत में ले लिया जिसको लेकर रातभर हंगामा हुआ, पुलिस ने 5 घण्टे बाद छोड़ा, कोटपूतली में पार्षदों के गायब होने के आरोप लगे, डेगाना में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष को देर रता थाने में ले गई पुलिस, टोंक में भाजपा की बाड़ाबंदी में कांग्रेस की पार्षद को ले जाया गया, सीकर के लोसल नगरपालिका में कांग्रेस पार्षदों के कैम्प में पुलिस गई, अजमेर में कांग्रेस पार्षदों की बस रोकी गई, अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से प्रशासन ने अभद्रता की,

 बहरोड़ में संजय यादव से पुलिस प्रशासन ने अभद्रता की, मथानिया में पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने आरोप लगाये कांग्रेस पार्षदों को वोट करने से रोका गया, डूण्डलोद, रतननगर, सादुलपुर में भी पुलिस प्रशासन का दुरूपयोग हुआ, कुचेरा में किसी पुराने मामले में चेयरमेन प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी करने का प्रयास किया गया, हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली, कांग्रेस विधायक ललित यादव पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया, संगरिया में विधायक अभिमन्यु पूनियां से अभद्रता पुलिस ने की, 

सुल्तानपुर नगरपालिका के चुनाव में विधायक चेतन पटेल सहित 15-20 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, ऐसे कई उदाहरण है जो पुलिस बरबरता के राजस्थान में सामने आये हैं। आश्चर्य कि बात है कि कांग्रेस के पार्षद के नहीं पहुॅंचने पर खाटू श्यामजी के नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव को टाल दिया गया और 25 तारीख को चुनाव करायेंगे, यह निर्णय लिया गया, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है।

डोटासरा ने कहा कि भाजपा ने पुलिस प्रशासन का दुरूपयोग कांग्रेस तथा कांग्रेस समर्थित पार्षदों का मत हासिल करने के लिये किया और नियमों की धज्जियां उड़ाई जिससे प्रदेश की जनता भाजपा से और भाजपा सरकार से नाराज है, आगामी पंचायत राज चुनावों में प्रदेश की जनता भाजपा को सबक सिखायेगी।

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