नाबार्ड ने धूमधाम से मनाया 12वाँ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस
० आशा पटेल ०
जयपुर, नाबार्ड राजस्थान क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा “विकसित भारत के लिए ग्रामीण शिल्पकारों का सशक्तिकरण” विषय के साथ 12वाँ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. आर. रवि बाबू, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, राजस्थान तथा राम किशोर छीपा, पद्मश्री सम्मानित एवं प्रख्यात बगरू शिल्पकार द्वारा किया गया।
इस अवसर पर राम किशोर छीपा ने भारत की विविध हथकरघा परंपराओं के समन्वय की वकालत करते हुए बगरू प्रिंट और चंदेरी साड़ियों के फ्यूजन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार पारंपरिक कला को संरक्षित रखते हुए नए बाजार अवसर सृजित कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से शिल्पकारों के समर्थन और भारतीय वस्त्र विरासत के संरक्षण हेतु सप्ताह में कम से कम एक दिन हथकरघा वस्त्र पहनने का आह्वान भी किया।
कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी अपनाने, डिज़ाइन नवाचार, शिल्पकार संगठनों को सशक्त बनाने तथा शिल्पकार सशक्तिकरण के लिए हितधारकों के समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से संबंधित विभिन्न योजनाओं, चुनौतियों एवं अवसरों पर विचार-विमर्श किया तथा वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, विपणन सहायता और संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा की।
जयपुर, नाबार्ड राजस्थान क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा “विकसित भारत के लिए ग्रामीण शिल्पकारों का सशक्तिकरण” विषय के साथ 12वाँ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. आर. रवि बाबू, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, राजस्थान तथा राम किशोर छीपा, पद्मश्री सम्मानित एवं प्रख्यात बगरू शिल्पकार द्वारा किया गया।
डॉ. रवि बाबू ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा यह 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का प्रथम आयोजन वर्ष 2015 में चेन्नई में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया गया था।
डॉ. रवि बाबू ने कहा कि नाबार्ड समेकित ग्रामीण विकास के लिए कृषि एवं गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रहा है। हथकरघा गणना 2019-20 का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश में लगभग 35 लाख परिवार हथकरघा गतिविधियों से जुड़े हैं तथा राजस्थान में 10,090 बुनकर इस क्षेत्र में कार्यरत हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आजीविका सृजन, महिला सशक्तिकरण तथा पारंपरिक विरासत संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी उन्नयन, डिज़ाइन नवाचार, ऋण उपलब्धता, विपणन संपर्क तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिल्पकारों की आय में वृद्धि, आजीविका सुरक्षा तथा जमीनी स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए सभी हितधारकों को समन्वित प्रयास करने होंगे।
डॉ. रवि बाबू ने नाबार्ड की विभिन्न पहलों जैसे राजस्थान के 23 उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण एवं अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकरण, ग्रामीण मार्ट, ग्रामीण हाट, उत्पादक संगठनों के संवर्धन, प्रदर्शनियों के आयोजन तथा कौशल एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर राम किशोर छीपा ने भारत की विविध हथकरघा परंपराओं के समन्वय की वकालत करते हुए बगरू प्रिंट और चंदेरी साड़ियों के फ्यूजन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार पारंपरिक कला को संरक्षित रखते हुए नए बाजार अवसर सृजित कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से शिल्पकारों के समर्थन और भारतीय वस्त्र विरासत के संरक्षण हेतु सप्ताह में कम से कम एक दिन हथकरघा वस्त्र पहनने का आह्वान भी किया।
कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी अपनाने, डिज़ाइन नवाचार, शिल्पकार संगठनों को सशक्त बनाने तथा शिल्पकार सशक्तिकरण के लिए हितधारकों के समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से संबंधित विभिन्न योजनाओं, चुनौतियों एवं अवसरों पर विचार-विमर्श किया तथा वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, विपणन सहायता और संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में अर्चना सुराणा, संस्थापक एवं निदेशक, आर्च कॉलेज ऑफ डिज़ाइन एंड बिज़नेस; राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार राज कुमार पाण्डेय; डॉ. संतोष कुमार धनोपिया; एसएलबीसी, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
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