निजी पूंजी जुटाने में ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष एक जैसी संरचनात्मक चुनौतियां— वित्त मंत्री सीतारमण

० आशा पटेल ० 
जयपुर। केन्द्रीय वित्त तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने जयपुर में हो रही ब्रिक्स के सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों एवं केन्द्रीय बैंक के गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की बैठक के दौरान “द रोल ऑफ द न्यू डेवलपमेंट बैंक इन मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल इन मेंबर कंट्रीज” विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य भाषण दिया। सुश्री डिल्मा रूसेफ ने भी विशेष संबोधन दिया। इस सेमिनार में आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) की सचिव अनुराधा ठाकुर और फिक्की के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विजय शंकर भी शामिल हुए।
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने निवेश के जोखिम को कम करने, परियोजना को बैंक के लिए आकर्षक बनाने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में बहुपक्षीय विकास बैंकों की अहम भूमिका पर जोर दिया ताकि बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाई जा सके। सीतारमन ने कहा कि भारत सरकार ने निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और उससे जुड़े संरचनात्मक सुधारों के जरिए अपने अवसंरचना इकोसिस्टम को मजबूत किया है। 
उन्होंने कहा कि एक दशक पहले की तुलना में सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स प्रणालियों, डिजिटल अवसंरचना और ऊर्जा नेटवर्कों में उत्पादक राष्ट्रीय परिसंपत्तियां बनाने की एक सोची-समझी रणनीति को दर्शाता है। भारत सरकार का मानना ​​है कि सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश का विकल्प नहीं बल्कि उसके उत्प्रेरक के तौर पर कार्य करना चाहिए। इसी सिद्धांत के समर्थन में भारत सरकार ने विभिन्न सुधार किए हैं
 सीतारमन ने बताया कि कि ब्रिक्स के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास के मुख्य इंजन हैं, वहीं बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने में उन्हें एक जैसी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। चुनौती सिर्फ पूंजी की उपलब्धता की ही नहीं बल्कि भरोसा, स्थिरता, पूर्वानुमेयता और विश्वसनीय दीर्घकालिक ढांचे तैयार करने की भी है, जो सदस्य देशों में निजी क्षेत्र की निरंतर भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु जरूरी हैं।
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकासात्मक वित्त का भविष्य साझेदारी में निहित है। बहुपक्षीय संस्थाओं, राष्ट्रीय सरकारों और निजी क्षेत्र सहित सभी की अपनी-अपनी विशिष्ट खूबियां हैं।
आर्थिक कार्य विभाग की सचिव श्रीमती अनुराधा ठाकुर ने कहा कि आज की सेमिनार खास तौर पर प्रासंगिक है क्योंकि विकासात्मक वित्त अब ऐसे दौर में है जहां बड़े पैमाने पर काम करने के साथ मजबूती भी जरूरी है। पूंजी जुटाना सिर्फ अनुकूल परिस्थितियों पर ही निर्भर नहीं हो सकता। इसे ऐसे ढांचों पर आधारित होना चाहिए जो लंबे समय तक टिके रहें।
इस सेमिनार में वरिष्ठ नीति निर्माता, बहुपक्षीय संस्थाओं और निजी कंपनियों के प्रमुख एक साथ आए। इसके बाद आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ, एनडीबी के वाइस-प्रेसिडेंट रोमन सेरोव, सर्ट्रेडिंग के एलेसेंड्रो टेक्सीरा, टेनसेंट के सीनियर एडवाइजर योंगपिंग झाई, टाटा कैपिटल डिकार्बनाइजेशन फंड के पंकज सिंडवानी और ब्रिक्स के सदस्य देशों, वित्तीय संस्थाओं, थिंक टैंक और अकादमिक जगत के अन्य प्रतिनिधियों के साथ पैनल चर्चा हुई।

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