भारतीय युवाओं में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता : प्रा.आ.राम शिंदे
लोणी-कालभोर (पुणे)। किसी परिवार का पहला स्नातक केवल अपना भविष्य नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए शिक्षा केवल करियर निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। आज का दौर अवसरों का दौर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा साइंस, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल टेक्नोलॉजी और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में अवसरों के नए द्वार खुल रहे हैं। दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव का नेतृत्व करने की क्षमता भारतीय युवाओं में है। यह विचार महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रा. आ. राम शिंदे ने व्यक्त किए।वे एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, पुणे के 11वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर एमएईईआरएस एमआईटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के पूर्व महानिदेशक पद्मश्री प्रा. डॉ. बलराम भार्गव, एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष एवं प्रभारी कुलपति प्रा. डॉ. मंगेश कराड, कुलगुरु प्रा. डॉ. राजेश एस., कार्यकारी संचालक प्रा. डॉ. सुनीता कराड, प्रोवोस्ट डॉ. सायली गणकर, प्र-कुलगुरु डॉ. रामचंद्र पुजेरी, डॉ. मोहित दुबे, डॉ. नचिकेत ठाकुर और कुलसचिव डॉ. महेश चोपडे सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।प्रा. शिंदे ने कहा कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है। ज्ञान के साथ उसका दैनिक जीवन में उपयोग करने का कौशल, चरित्र और सामाजिक प्रतिबद्धता भी जरूरी है। तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, मानवता का स्थान कोई तकनीक नहीं ले सकती। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक कौशल-आधारित, शोधोन्मुख और वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐसे समय में एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाएं देश में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में स्टार्टअप और उद्यमिता की भावना विकसित कर रहे हैं। इसलिए यहां से निकलने वाले विद्यार्थी केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनेंगे, ऐसा विश्वास है।
प्रा. डॉ. मंगेश कराड ने कहा कि वर्तमान युग तकनीक का है। तकनीक में तेजी से हुई प्रगति के कारण आज पूरी दुनिया एक क्लिक पर आ गई है। तेजी से बदलते तकनीकी दौर में विद्यार्थियों के साथ प्राध्यापकों को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के साथ कदम मिलाना होगा। विद्यार्थियों में शोध की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि अब विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उनमें उद्यमिता, नवाचार की सोच और वैश्विक स्तर पर रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना जरूरी है। विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भारत में आ रहे हैं। ऐसे में भारतीय विश्वविद्यालयों को भी वैश्विक स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
विश्वशांति प्रार्थना से शुरू हुए कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। प्रास्ताविक डॉ. राजेश एस. ने किया, जबकि आभार डॉ. रामचंद्र पुजेरी ने माना। संचालन प्रा. श्रद्धा वाघटकर, प्रा. स्वप्निल शिरसाठ और डॉ. अशोक घुगे ने किया।
पद्मश्री प्रा. डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु अनुसंधान और रक्षा क्षेत्र में देश की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। भारत वर्तमान में दुनिया को जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। बड़ी संख्या में दवाएं और टीके भारतीय तकनीक एवं निर्माण क्षमता का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के अनेक डॉक्टर और नर्स दुनिया के विभिन्न देशों में गर्व के साथ सेवाएं दे रहे हैं। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित टीकों ने लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सभी को पूरी क्षमता से प्रयास करना चाहिए।
प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि विद्यार्थियों को नई तकनीक के साथ मूल्याधारित शिक्षा मिले, इसी उद्देश्य से एमआईटी जैसी शैक्षणिक संस्था की स्थापना की गई। आज एमआईटी से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज के विश्वशांति तथा विज्ञान के संदेश को पहुंचाते दिखाई देते हैं।
महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ नेवल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (MANET) के प्राचार्य कैप्टन प्रेरित मिश्रा को विश्वविद्यालय की स्थापना एवं विकास में उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही डॉ. अश्विनी पेठे, डॉ. अभय हरसूलकर, डॉ. प्रणव पाठक, डॉ. दांडेश्वर बिसोई, श्री राजीव काशिकर, डॉ. सुरेश कापरे और डॉ. अशोक तोडमल को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
उन्होंने कहा कि अब विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उनमें उद्यमिता, नवाचार की सोच और वैश्विक स्तर पर रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना जरूरी है। विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भारत में आ रहे हैं। ऐसे में भारतीय विश्वविद्यालयों को भी वैश्विक स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
विश्वशांति प्रार्थना से शुरू हुए कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। प्रास्ताविक डॉ. राजेश एस. ने किया, जबकि आभार डॉ. रामचंद्र पुजेरी ने माना। संचालन प्रा. श्रद्धा वाघटकर, प्रा. स्वप्निल शिरसाठ और डॉ. अशोक घुगे ने किया।
पद्मश्री प्रा. डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु अनुसंधान और रक्षा क्षेत्र में देश की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। भारत वर्तमान में दुनिया को जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। बड़ी संख्या में दवाएं और टीके भारतीय तकनीक एवं निर्माण क्षमता का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के अनेक डॉक्टर और नर्स दुनिया के विभिन्न देशों में गर्व के साथ सेवाएं दे रहे हैं। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित टीकों ने लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सभी को पूरी क्षमता से प्रयास करना चाहिए।
प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि विद्यार्थियों को नई तकनीक के साथ मूल्याधारित शिक्षा मिले, इसी उद्देश्य से एमआईटी जैसी शैक्षणिक संस्था की स्थापना की गई। आज एमआईटी से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज के विश्वशांति तथा विज्ञान के संदेश को पहुंचाते दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि साथ-साथ चलने वाले विषय हैं। इसी विचार के अनुरूप एमआईटी एडीटी परिसर में विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है, यह मेरे लिए गर्व की बात है।
महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ नेवल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (MANET) के प्राचार्य कैप्टन प्रेरित मिश्रा को विश्वविद्यालय की स्थापना एवं विकास में उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही डॉ. अश्विनी पेठे, डॉ. अभय हरसूलकर, डॉ. प्रणव पाठक, डॉ. दांडेश्वर बिसोई, श्री राजीव काशिकर, डॉ. सुरेश कापरे और डॉ. अशोक तोडमल को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
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