भाजपा का आगामी नगर निकाय पंचायत चुनाव में सूपड़ा साफ हो जायेगा : डोटासरा
० संवाददाता द्वारा ०
जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा नगर निकायों एवं पंचायत राज संस्थाओं के सभापतियों की लॉटरी निकाली गई, किन्तु उस लॉटरी में सरकार ने जो ओबीसी तथा अनुसूचित जाति और जनजाति के आंकड़े दिये हैं अतार्किक और गलत है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी हमेशा कहते हैं कि भाजपा संविधान पर चोट कर रही है और आरक्षण को खत्म करना चाहती है, जबकि देश में अनुसूचित जाति/जनजाति और ओबीसी की जितनी आबादी है उसके हिसाब से उनकी भागीदारी एवं हिस्सेदारी होनी चाहिये। सरकार ने लम्बे समय से अनुसूचित जाति और जनजाति की जनगणना नहीं करवाई, जातिगत जनगणना से भी भाजपा कतरा रही है, क्योंकि उनके मन में बेईमानी है, ये लोग एससी/एसटी और अब ओबीसी के साथ न्याय नहीं करना चाहते और इसकी शुरुआत राजस्थान से की गई है। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान सरकार ने जिस प्रकार आंकड़े दिये हैं उनमें विसंगति है, पूरे राजस्थान के अन्दर जो ग्रामीण परिवेश की जनसंख्या ओबीसी की बताई गई है उसमें पंचायत समितियां की टोटल और जिला परिषद की जनसंख्या एक होनी चाहिये, इसमें फर्क नहीं होना चाहिये, किन्तु सरकार द्वारा बताये गये आंकड़ों के अनुसार जिला परिषद के अंतर्गत और पंचायत समितियों की एक ही जिले की जनसंख्या में कई प्रतिशत अंतर है, ऐसा वास्तविक रूप से नहीं हो सकता है,
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान सरकार ने जिस प्रकार आंकड़े दिये हैं उनमें विसंगति है, पूरे राजस्थान के अन्दर जो ग्रामीण परिवेश की जनसंख्या ओबीसी की बताई गई है उसमें पंचायत समितियां की टोटल और जिला परिषद की जनसंख्या एक होनी चाहिये, इसमें फर्क नहीं होना चाहिये, किन्तु सरकार द्वारा बताये गये आंकड़ों के अनुसार जिला परिषद के अंतर्गत और पंचायत समितियों की एक ही जिले की जनसंख्या में कई प्रतिशत अंतर है, ऐसा वास्तविक रूप से नहीं हो सकता है,
क्योंकि शहरी क्षेत्र को निकालने के पश्चात ग्रामीण क्षेत्र में जिले की जो जनसंख्या बचेगी उसी से जिला परिषद और इस जनसंख्या की पंचायत समिति जिले में होनी चाहिये। उच्चतम न्यायालय ने नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण का कैप रहने की बात कही है, लेकिन राजनीति में जो एमएलए व एमपी चुनकर आते हैं उसके संदर्भ में ऐसी कोई बात नहीं है, किन्तु यदि उच्चतम न्यायालय द्वारा नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था दी गई है,
उसका भी अनुसरण करें तो राजस्थान में अनुसूचित जाति/जनजाति और ओबीसी को नगर निकायों और पंचायत समितियों, जिला परिषदों में 50 प्रतिशत तक आरक्षण प्रदान नहीं किया गया है। अजमेर में अनुसूचित जनजाति/जाति और ओबीसी का कुल आरक्षण 39.97 प्रतिशत है, बालोतरा में यह 41.93 प्रतिशत, डीग में 34.48 प्रतिशत, डीडवाना कुचामन में 42.85 प्रतिशत, जैसलमेर में 38 प्रतिशत है, जबकि यहां 40 प्रतिशत से ओबीसी कम नहीं है, अगर उसके बाद भी 21 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण एससी/एसटी को देने के बाद दिया जाये तो भी 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं होगा।
झुंझुनू में आरक्षण मात्र 39 प्रतिशत, कोटपूतली-बहरोड में 37 प्रतिशत, फलोदी में 39.13 प्रतिशत और सीकर में 40.8 प्रतिशत ही आरक्षण दिया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी को मिलाकर 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिये था, लेकिन इनका आरक्षण 40 प्रतिशत से भी कम रखा गया है, जबकि यह 50 प्रतिशत हो सकता है। जिन जिलों में ओबीसी की जनसंख्या अधिक है वहां भी जनसंख्या के आधार पर कम सीटें आरक्षित की गई है। सरकार ने किस आधार पर कहां कितना आरक्षण दिया है यह समझ से परे है,
अलवर चित्तौडग़ढ़, दौसा, करौली, श्रीगंगानगर में ओबीसी की सीटों का अलग-अलग प्रतिशत है, क्राईटऐरिया 9.9 प्रतिशत का इन्होंने तय कर लिया, डीडवाना-कुचामन, पाली, फलोदी, राजसमंद में 11.11 प्रतिशत, जबकि ओबीसी इन सभी जिलों में 50 से 45 प्रतिशत से अधिक है, एससी/एसटी को मिला कर 21 प्रतिशत आरक्षण भी ओबीसी वर्ग को दें तो भी यह 50 प्रतिशत से काम रहेगा, लेकिन सिर्फ जन आधार कार्ड के आधार पर किस प्रकार ओबीसी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़े होने की जॉंच की गई वह किसी सामाजिक वर्ग से तुलनात्मक आधार पर की गई है,
इसका कोई तार्किक आधार व प्रमाण नहीं बताया गया है। प्रदेश में कुल 41 जिला परिषद में 1403 जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र है, जिनमें से आयोग द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केवल 192 वार्ड आरक्षित करने की अनुशंसा की गई है, जो मात्र 13.68 प्रतिशत है, जबकि यदि कुल 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा से भीतर रहते हुए भी ओबीसी के लिए आरक्षण किया जाता तो कुल 294 वार्ड आरक्षित होते, इस प्रकार ओबीसी वर्ग के लिए 102 वार्ड कम आरक्षित हुए हैं।
इसी प्रकार राज्य में कुल 457 पंचायत समितियां में कुल 8245 पंचायत समिति सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्र हैं, इनमें से ओबीसी के लिए मात्र 1101 वार्ड आरक्षित करने की अनुशंसा की गई है, जो केवल 13.35 प्रतिशत के लगभग है, जबकि यदि कुल 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा के भीतर रहते हुए ओबीसी के लिए 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये तो कुल 1731 वार्ड आरक्षित होते, इस प्रकार ओबीसी वर्ग के लिए 630 वार्ड कम आरक्षित किए गए हैं, जिसका कोई स्पष्ट कारण सरकार ने नहीं बताया।
डोटासरा ने कहा कि भाजपा की सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति और ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के आधार पर भागीदारी नहीं दे रही है और सभी प्रदेशवासी भाजपा सरकार की इस तानाशाही के विरोध में सडक़ों पर उतरेंगे और भाजपा का आगामी नगर निकाय पंचायत चुनाव में सूपड़ा साफ हो जायेगा।
डोटासरा ने कहा कि भाजपा की सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति और ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के आधार पर भागीदारी नहीं दे रही है और सभी प्रदेशवासी भाजपा सरकार की इस तानाशाही के विरोध में सडक़ों पर उतरेंगे और भाजपा का आगामी नगर निकाय पंचायत चुनाव में सूपड़ा साफ हो जायेगा।
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