18 देशों के 36 डिजिटल क्रिएटर्स ने देखा जयपुर- उदयपुर
० आशा पटेल ०
जयपुर। राजस्थान की विरासत, संस्कृति और पर्यटन अनुभव अब लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों की डिजिटल दुनिया तक पहुंचेंगे। भारत की सार्वजनिक कूटनीति पहल के तहत 18 देशों के 36 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर्स 9 से 16 अगस्त तक राजस्थान के दौरे पर हैं।विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित इस फेमिलियराइजेशन विजिट में क्रिएटर्स ने जयपुर की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य, संस्कृति और आधुनिक पर्यटन अनुभवों को करीब से जाना। डिजिटल क्रिएटर्स ने हवामहल, जंतर-मंतर और सिटी पैलेस का भ्रमण किया। इससे पूर्व यह दल उदयपुर और चित्तौड़गढ़ की विरासत, संस्कृति और स्थानीय जीवन का अनुभव कर चुका है।पर्यटन विभाग के उप निदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज पर्यटन की कहानी केवल पर्यटक तक पहुंचने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे डिजिटल माध्यमों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 18 देशों के 36 डिजिटल क्रिएटर्स का राजस्थान आना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने प्रदेश को केवल स्मारकों के रूप में नहीं देखा,
बहामास, बारबाडोस, बेलीज, बोलीविया, कोस्टा रिका, क्यूबा, डोमिनिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, जमैका, मैक्सिको, निकारागुआ, पनामा, पेरू, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस, सूरीनाम तथा त्रिनिदाद एंड टोबैगो से आए क्रिएटर्स ने राजस्थान की विविधता को अनुभव किया।
जयपुर पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने हवा महल, जंतर-मंतर और सिटी पैलेस का भ्रमण किया। जयपुर की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य और शहरी संस्कृति से रूबरू होने के बाद 15 अगस्त को क्रिएटर्स राज्य सरकार की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह भी देखेंगे। इसी दिन वे आमेर फोर्ट, जल महल और अल्बर्ट हॉल का दौरा करेंगे।
16 अगस्त को यात्रा पूरी होने के बाद प्रतिनिधिमंडल जयपुर से अपने-अपने देशों के लिए रवाना होगा। जयपुर प्रवास के दौरान क्रिएटर्स को राजस्थान की शाही विरासत के साथ यहां की जीवंत संस्कृति और आधुनिक पर्यटन अनुभवों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने यहां उदयपुर फोर्ट, पिछोला झील में बोट राइड और बाहुबली हिल्स का अनुभव लिया। इसके बाद करणी माता मंदिर की गंडोला राइड, बागोर की हवेली में लेकसाइड हेरिटेज वॉक, सहेलियों की बाड़ी और विंटेज कार म्यूजियम का दौरा किया गया।
प्रतिनिधिमंडल चित्तौड़गढ़ फोर्ट और म्यूजियम का भ्रमण किया। ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखने के बाद प्रतिनिधिमंडल उदयपुर लौटा और स्थानीय बाजार में खरीदारी का अनुभव लिया। इससे राजस्थान की पर्यटन यात्रा में विरासत स्थलों के साथ स्थानीय बाजार और उससे जुड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्था की भूमिका भी सामने आई।
विदेश मंत्रालय की फेमिलियराइजेशन विजिट का उद्देश्य विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों और डिजिटल क्रिएटर्स को भारत की विविधता, विरासत, संस्कृति और समकालीन विकास से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। राजस्थान के जयपुर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ को इस यात्रा में शामिल किए जाने से प्रदेश की विरासत के अलग-अलग आयामों को एक साथ प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
राजस्थान के लिए यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें दक्षिण और मध्य अमेरिका तथा कैरेबियाई क्षेत्र के देशों के डिजिटल क्रिएटर्स शामिल रहे। ये क्रिएटर्स अपने-अपने देशों में बड़े डिजिटल दर्शक वर्ग तक पहुंच रखते हैं और राजस्थान में देखे-समझे अनुभवों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं।
शेखावत के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर्यटन प्रचार की तस्वीर बदल रहे हैं। किसी गंतव्य को देखने वाले व्यक्ति का अनुभव जब वीडियो, रील, पोस्ट या डिजिटल स्टोरी के रूप में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचता है, तो वह स्वयं उस गंतव्य का प्रभावी परिचय बन जाता है। राजस्थान की कोशिश ऐसे अनुभवों को दुनिया के नए दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की पर्यटन ताकत केवल उसके किलों और महलों में नहीं, बल्कि उन अनुभवों में है जो पर्यटक यहां आकर अपने साथ लेकर जाते हैं। विदेशी डिजिटल क्रिएटर्स ने इन्हीं अनुभवों को महसूस किया है और अब उनके माध्यम से राजस्थान की कहानी उन देशों के दर्शकों तक पहुंचने का अवसर बनेगी, जहां पारंपरिक पर्यटन प्रचार की पहुंच अपेक्षाकृत सीमित रही है।
जयपुर। राजस्थान की विरासत, संस्कृति और पर्यटन अनुभव अब लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों की डिजिटल दुनिया तक पहुंचेंगे। भारत की सार्वजनिक कूटनीति पहल के तहत 18 देशों के 36 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर्स 9 से 16 अगस्त तक राजस्थान के दौरे पर हैं।विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित इस फेमिलियराइजेशन विजिट में क्रिएटर्स ने जयपुर की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य, संस्कृति और आधुनिक पर्यटन अनुभवों को करीब से जाना। डिजिटल क्रिएटर्स ने हवामहल, जंतर-मंतर और सिटी पैलेस का भ्रमण किया। इससे पूर्व यह दल उदयपुर और चित्तौड़गढ़ की विरासत, संस्कृति और स्थानीय जीवन का अनुभव कर चुका है।पर्यटन विभाग के उप निदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज पर्यटन की कहानी केवल पर्यटक तक पहुंचने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे डिजिटल माध्यमों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 18 देशों के 36 डिजिटल क्रिएटर्स का राजस्थान आना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने प्रदेश को केवल स्मारकों के रूप में नहीं देखा,
बल्कि यहां के जीवन, संस्कृति, प्रकृति, बाजार और पर्यटन अनुभवों को करीब से महसूस किया है। उनके अपने-अपने देशों के डिजिटल दर्शकों तक ये अनुभव पहुंचेंगे तो राजस्थान की पर्यटन पहचान को नए बाजारों में विस्तार मिलेगा।
बहामास, बारबाडोस, बेलीज, बोलीविया, कोस्टा रिका, क्यूबा, डोमिनिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, जमैका, मैक्सिको, निकारागुआ, पनामा, पेरू, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस, सूरीनाम तथा त्रिनिदाद एंड टोबैगो से आए क्रिएटर्स ने राजस्थान की विविधता को अनुभव किया।
जयपुर पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने हवा महल, जंतर-मंतर और सिटी पैलेस का भ्रमण किया। जयपुर की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य और शहरी संस्कृति से रूबरू होने के बाद 15 अगस्त को क्रिएटर्स राज्य सरकार की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह भी देखेंगे। इसी दिन वे आमेर फोर्ट, जल महल और अल्बर्ट हॉल का दौरा करेंगे।
16 अगस्त को यात्रा पूरी होने के बाद प्रतिनिधिमंडल जयपुर से अपने-अपने देशों के लिए रवाना होगा। जयपुर प्रवास के दौरान क्रिएटर्स को राजस्थान की शाही विरासत के साथ यहां की जीवंत संस्कृति और आधुनिक पर्यटन अनुभवों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने यहां उदयपुर फोर्ट, पिछोला झील में बोट राइड और बाहुबली हिल्स का अनुभव लिया। इसके बाद करणी माता मंदिर की गंडोला राइड, बागोर की हवेली में लेकसाइड हेरिटेज वॉक, सहेलियों की बाड़ी और विंटेज कार म्यूजियम का दौरा किया गया।
प्रतिनिधिमंडल चित्तौड़गढ़ फोर्ट और म्यूजियम का भ्रमण किया। ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखने के बाद प्रतिनिधिमंडल उदयपुर लौटा और स्थानीय बाजार में खरीदारी का अनुभव लिया। इससे राजस्थान की पर्यटन यात्रा में विरासत स्थलों के साथ स्थानीय बाजार और उससे जुड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्था की भूमिका भी सामने आई।
विदेश मंत्रालय की फेमिलियराइजेशन विजिट का उद्देश्य विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों और डिजिटल क्रिएटर्स को भारत की विविधता, विरासत, संस्कृति और समकालीन विकास से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। राजस्थान के जयपुर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ को इस यात्रा में शामिल किए जाने से प्रदेश की विरासत के अलग-अलग आयामों को एक साथ प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
राजस्थान के लिए यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें दक्षिण और मध्य अमेरिका तथा कैरेबियाई क्षेत्र के देशों के डिजिटल क्रिएटर्स शामिल रहे। ये क्रिएटर्स अपने-अपने देशों में बड़े डिजिटल दर्शक वर्ग तक पहुंच रखते हैं और राजस्थान में देखे-समझे अनुभवों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं।
शेखावत के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर्यटन प्रचार की तस्वीर बदल रहे हैं। किसी गंतव्य को देखने वाले व्यक्ति का अनुभव जब वीडियो, रील, पोस्ट या डिजिटल स्टोरी के रूप में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचता है, तो वह स्वयं उस गंतव्य का प्रभावी परिचय बन जाता है। राजस्थान की कोशिश ऐसे अनुभवों को दुनिया के नए दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की पर्यटन ताकत केवल उसके किलों और महलों में नहीं, बल्कि उन अनुभवों में है जो पर्यटक यहां आकर अपने साथ लेकर जाते हैं। विदेशी डिजिटल क्रिएटर्स ने इन्हीं अनुभवों को महसूस किया है और अब उनके माध्यम से राजस्थान की कहानी उन देशों के दर्शकों तक पहुंचने का अवसर बनेगी, जहां पारंपरिक पर्यटन प्रचार की पहुंच अपेक्षाकृत सीमित रही है।
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