पंचायत चुनाव की तैयारी राजस्थान कांग्रेस द्वारा डेगाना,जिला नागौर से चुनाव अभियान शुरू

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर । प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत राज चुनाव की तैयारी हेतु राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जिस डेगाना, जिला नागौर की भूमि पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पंचायत राज की स्थापना की थी, उस भूमि पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में पंचायत राज कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर, चुनाव अभियान प्रारम्भ किया गया।
सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस विधायक, विधायक प्रत्याशी, पार्टी पदाधिकारी और हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन से पूर्व प्रदेश कांग्र्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा तथा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का विधानसभा क्षेत्र बगरू, दूदू, अजमेर, ब्यावर एवं नागौर जिलों मेंं कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया गया।
पंचायत राज कार्यकर्ता सम्मेलन में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि जिस जिले में उनका ननिहाल है और उनका जन्म हुआ ऐसे नागौर जिले में जन्मदिवस के अवसर पर अपार जनसमूह के बीच कार्यकर्ता सम्मेलन में उपस्थित होने का मौका मिलना सबसे बड़ा खुशी का पल है। नागौर से देश में पंचायती राज की स्थापना हुई थी और आज कांग्रेस पार्टी आगामी पंचायती राज चुनाव की तैयारी के लिए अपना चुनाव प्रचार अभियान स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर प्रारम्भ कर रही है।
जिस धरती से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पंचायत राज की स्थापना की थी, उस धरती पर आज कांग्रेस पार्टी पंचायत राज सम्मेलन आयोजित कर रही है, क्योंकि यह एक ऐतिहासिक कार्य डेगाना की धरती पर सम्पन्न हुआ है। किसान के घर में जन्म लेने से गरीब किसान किस तरह अपने बच्चों को शिक्षा देता है, पालन पोषण करता है, जीवनयापन करता है, इससे भलीभांति वह परिचित हैं। समाज में एक किसान कैसे अपने परिवार के साथ आगे बढ़ता है, इन परिस्थितियों का मैंने सामना किया है और पंचायती राज के माध्यम से अपनी राजनीतिक शुरुआत कर आज यह मुकाम हासिल किया है,

 जो कांग्रेस पार्टी की देन है। उन्होंने कहा कि वह चार साल प्रधान रहे, पांचवी साल कांग्रेस पार्टी के द्वारा मुझे विधानसभा का टिकट दिया गया और वह प्रथम चुनाव वर्ष 2008 में 34 वोटों से जीतकर विधायक बने, जब संविधान की शपथ ली तो एक शपथ यह भी ली थी कि कांग्रेस पार्टी ने मौका दिया है और जनता ने आशीर्वाद दिया है, तो ईमानदारी से जनसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देंगे उसके बाद लक्ष्मणगढ़ के मतदाताओं ने चार बार विधानसभा में जनसेवा के लिए चुनकर भेजा।

 2009 में पार्टी द्वारा सीकर जिलाध्यक्ष बनाने का गौरव प्रदान किया, सात वर्ष उस पद पर काम किया। राजस्थान विधानसभा में स्व. रामेश्वर डूडी नेता प्रतिपक्ष थे, उनके साथ कार्य किया और जब सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने तो उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवायें दी। जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने तो शिक्षा मंत्री के रूप में जनता की सेवा करने का मौका मिला और अब 6 साल से अधिक समय कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का मौका मिला है,

 यह प्रदेश की जनता से मिले आशीर्वाद और आलाकमान के विश्वास के कारण सम्भव हो सका है, पद पार्टी ने दिया और सम्मान जनता ने दिया है, इसलिए फर्ज बनता है कि प्रदेश के गरीब, किसान, नौजवान, दलितों, पिछड़ो, माता-बहनों और युवाओं के लिए उन्हें साथ लेकर आदर करते हुए, सेवा करते हुए जिस पार्टी ने इतना मौका दिया है उसे मजबूत करने और आगे बढ़ाने का काम कर रहा हूॅं, सभी का भरपूर आशीर्वाद मिला और टीकाराम जूली के साथ राजस्थान की विधानसभा में भाजपा की सरकार की नाक में नकेल डालकर जनता के प्रति जवाबदेही लेने का कार्य किया जा रहा है।

 2013 से 2018 के बीच राजस्थान की जनता के लिए विधानसभा में अनेक मुद्दे उठाए, किसानों के लिए ट्यूबवेल लेने का मुद्दा हो या किसान कर्ज माफी का मुद्दा हो, मजबूती से उठाया, इसलिए उस वक्त सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने दिया था।

 डोटासरा ने कहा कि पंचायत राज चुनाव में प्रत्याशियों के चयन की बात हो रही है लेकिन यह समझना होगा कि सामने वाली भारतीय जनता पार्टी किस तरह से बेईमानीपूर्वक चुनाव लड़ रही है, इसकी चर्चा आम जनता के बीच होनी चाहिए, गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक भाजपा की बेईमानी को ले जाना होगा, उसके बाद रणनीति बनाकर के चुनाव लडऩा होगा। देश मेंं जब कांग्रेस पार्टी का शासन आया तो कांग्रेस सरकार ने अनिवार्य शिक्षा का कानून बनाया, खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया, सूचना का अधिकार दिया, नौजवानों को 18 वर्ष की उम्र में वोट का अधिकार दिया, 

किसानों का 72 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया, गरीब को मजदूरी दिलाने के काम की गारंटी देने का कानून मनरेगा कांग्रेस सरकार ने ही लागू किया था, किन्तु जब से दिल्ली में भाजपा की सरकार बनी है, मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने तो बड़े-बड़े वादे करके बने, किसानों की आय दुगनी कर देने का वादा किया था, चीन को, पाकिस्तान को लाल ऑंख दिखाने की बात कहते थे, नई शिक्षा नीति लाकर मूलभूत परिवर्तन की बात कहते थे, लेकिन आज 12 साल बीतने के बाद भी उन वादों का कोई हिसाब देने के लिए भाजपा में तैयार नहीं है, उन भाजपाईयों ने अगर कुछ किया तो देश में नोटबंदी लागू की, किसानों के लिए काले कानून लागू किये, 

ऐसे कानून बनाए कि आदमी अपनी जमीन से वंचित हो जाता और आधे मूल्य पर फसल बेचनी पड़ती तथा उद्योगपती दोगुनी कीमत पर बेचकर आम लोगों का शोषण करते। दूसरा चुनाव मोदी जी ने सैना के शौर्य के पीछे छुपकर लड़ लिया, तीसरा चुनाव फिर वोट चोरी और पाखण्ड के आधार पर लडक़र सरकार बना ली, आज स्थिति यह हो गई है कि लोगों को सरकार से असहमति जताने का अधिकार नहीं है, सरकार के खिलाफ बोलने पर ईडी आ जाएगी, इनकम टैक्स आ जायेगी, मर्जी हो उसके खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कर देते हैं, मुकदमे बना देते हैं, गिरफ्तार कर लेते हैं, किसान की कोई सुनने वाला नहीं है, अधिकारी सुन नहीं रहे हैं, 

मंत्रियों की और जनप्रतिनिधियों की भी सुनवाई भाजपा के शासन में नहीं हो रही है, किसान के बेटा सम्मान के साथ देश की सरहदों की रक्षा के लिए फौज में भर्ती होता है उसे अग्निवीर बनाकर 4 साल में रिटायर करने का निर्णय ले लिया और कहते हैं कि राजस्थान में निचले पदों पर रिटायर हुए अग्निवीर को प्राथमिकता देंगे, जो किसान का बेटा देश की सेवा के लिए सरहद पर प्राण न्यौछावर करने और शहीद होने के लिए तैयार रहता था उसे 4 साल में ही रिटायर करने का गलत कार्य बीजेपी ने किया है। पौने तीन साल पहले जब राजस्थान में विधानसभा के चुनाव हुए तो प्रधानमंत्री ने बड़े-बड़े वादे किए, पड़ोसी राज्यों के बराबर पेट्रोल की कीमत हो जाएगी, महंगाई कम हो जाएगी,

 भ्रष्टाचार समाप्त कर देंगे, नौजवानों को नौकरी दी जाएगी और माता-बहनों की सुरक्षा की व्यवस्था करेंगे, किसान की आमदनी दुगनी कर देंगे, यह सब वादे तो राजस्थान से उन्होंने किये, सरकार भी बना ली लेकिन लोगों को भ्रमित करते-करते राजस्थान में ऐसा क्या कारण रहा कि पर्ची निकाल कर मुख्यमंत्री बना दिया, ऐसे व्यक्ति को जिसे शासन का ज्ञान नहीं है। राजस्थान से पर्ची से मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय केवल इसलिए लिया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सत्ता को कोई चुनौती न दे सके, वसुंधरा राजे से उन्हें चुनौती मिलती है,

 इसलिए प्रदेश में योग्यता बिना देखे भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया, मुख्यमंत्री बनने के बाद भजनलाल शर्मा सरकारी हेलीकॉप्टर से केवल भ्रमण कर रहे हैं, खबरें मिलती है कि विभिन्न जिलों में अलग-अलग जगह देव दर्शन करने जा रहे हैं, लेकिन उनसे यह जानना आवश्यक है कि भगवान में आस्था सभी रखते हैं, किन्तु क्या मुख्यमंत्री का दायित्व और जिम्मेदारी राजस्थान के नागरिकों का दु:ख-दर्द कैसे मिटे, प्रदेश का विकास कैसे हो, प्रदेशवासियों के बच्चों को नौकरी कैसे मिले, सडक़े कैसे ठीक हो, शिक्षा व्यवस्था में सुधार कैसे हो, बिजली कैसे मिलेगी, इन सबको निभाना भी आवश्यक है,

 ना कि राजस्थान की जनता की गाड़ी कमाई से दिए हुए टैक्स के पैसे से भ्रमण करना, लोगों को भ्रमित करने के लिए भाषण देना। मुख्यमंत्री का ऐसा रूप भी देखने को मिला कि पुलिस प्रशासन को साथ लेकर प्रदेशभर में पार्षद ढूंढने लग गये, पार्षदों की भूख उन में जागृत हो गई, कैसे भी करके कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित पार्षदों को पुलिस बल से डराकर-धमकाकर लाने का कार्य करने लग गये, जबकि यदि काम किया होता तो निकाय चुनाव में भाजपा को हार का मुंह देखना नहीं पड़ता, जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है कि जनता की सेवा करें, ना कि पुलिस के दम पर जनमत लूटें।

 लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार हुये निकाय चुनाव में भाजपा को मिलने वाला मत 15 प्रतिशत तक गिर गया। राजस्थान सरकार ने डेढ़ साल से पंचायत में प्रशासक लगा रखे हैं, चुनाव नहीं करा रहे हैं, अब कह रहे हैं कि जो प्रशासक लगे हुए हैं पंचायत चुनाव में यदि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो में उनका नामांकन निरस्त हो जाएगा। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा सरकार नामांकन निरस्त करके दिखायें, क्योंकि यह जानकारी सरकार को देनी होगी कि पंचायत में जो प्रशासक लगाये वह किस कानून से लगाये, किसने प्रशासक लगने के लिए एप्लीकेशन दी थी, 

वास्तविकता तो यह है कि भाजपा सरकार ने विफलता के डर से डेढ़ साल तक चुनाव नहीं कराए और प्रशासक लगा दिए, जबकि किसी सरपंच ने प्रार्थना पत्र नहीं दिया था कि प्रशासक लगाया जाये। कांग्रेस के सभी लोगों को एकजुटतो के साथ एकता बनाए रखकर, आपसी मतभेद बुलाकर चुनाव लडऩा होगा क्योंकि यदि भाजपा जो साम-दाम, दंड-भेद से चुनाव लड़ रही है, प्रशासन का दुरुपयोग कर चुनाव लड़ रही है, उसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में वोट का अधिकार भी छीन जाएगा, ना टाईम पर बिजली मिलेगी, ना युवाओं को नौकरी मिलेगी, किसानों को नकली बीज मिलेंगे, इसलिए भाजपा के कुशासन को समाप्त करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होना आवश्यक है। आज ही कि खबर है कि प्रदेश में मक्का का नकली बीज दिया गया, जिस मार्के का बीज था और टेस्ट में उस मार्के का नहीं निकला। यह हाल भाजपा के शासन में हो रहा है। कृषि मंत्री जब पहले खूब छापे मारते थे, अब उन्होंने छापे मारने क्यों बंद कर दिए, पहले तो कहते थे कि किसानों के हित में छापे डालता हूं, लेकिन वास्तविकता यह है कि माल लेकर अपनी अलमारियां भर ली, अगर किसान का ही भला सोचा होता तो खाद के लिए पुलिस का पहरा क्यों लगता है, डीएपी के लिए किसानों को कई दिन तक लाइन में क्यों लगना पड़ता है,

 उन पर लाठियां क्यों बरसाई जाती, खाद का मूल्य क्यों बढ़ाया गया, यदि किसान की चिंता थी तो किसान को समर्थन मूल्य बढ़ाकर क्यों नहीं दिया जाता है, किसान की चिंता है तो दूध पर बोनस क्यों नहीं मिल रहा और किसानों की आय दुगनी करने का वादा आज तक भाजपा ने पूरा क्यों नहीं किया, यह जवाब भाजपा को देना चाहिए। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी तो 14000 करोड़ रुपए किसानों के कर्ज के माफ किये गये, देश में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 72000 करोड़ रुपए किसानों के कर्ज के माफ किये और अब भाजपा बिजली, खाद मांगने वाले किसानों पर डंडे बरसाती है, 

आज कांग्रेस की मीटिंग में कई घंटे से किसान बैठे हैं और मुख्यमंत्री की मीटिंग में डेढ़ सौ कुर्सियां भी नहीं भरी, क्योंकि यह सरकार असफल हो गई है। मुख्यमंत्री ट्यूशन देने की बात कर रहे हैं और अपने गिरेबान में नहीं झांक रहे हैं। प्रदेश में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं, उस पर सरकार का ध्यान नहीं है, निकाय चुनाव में 152 एफआईआर दो दिन में किडनैपिंग की दर्ज कर पुलिस का सहारा लेते हुए प्रदेशभर में निकायों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर भाजपा ने गुंडागर्दी की। राजस्थान के इतिहास में कभी किसी चुनाव में पुलिस की इतनी गुंडागर्दी नहीं हुई जो निकाय चुनाव में भाजपा सरकार ने की है।

 प्रदेश में वसुंधरा राजे भी मुख्यमंत्री रही, अशोक गहलोत भी मुख्यमंत्री रहे लेकिन कभी निकाय और पंचायत चुनाव में हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने तो सारी हदें पार कर दी और लोकतंत्र पर कड़ा प्रहार करने का काम किया है। अब सरकार अधिकारियों के माध्यम से पंचायत में जनप्रतिनिधि बनने के लिए इच्छुक लोगों की सूची बनाने का कार्य कर रही है। भाजपा अपने प्रत्याशी चुने, कांग्रेस से कौन लडऩे वाला है यह जानकर वह क्या करना चाहते हैं, भाजपा का एक ही मकसद है कि कांग्रेस के प्रत्याशियों की जानकारी मिल जाए तो उनके घर में कौन सरकारी कर्मचारी है, उसके माध्यम से परिवार पर दबाव बनाया जा सके, मकान पर बुलडोजर की कार्रवाई की जा सके,

 कोई बड़ा आदमी होगा तो इनकम टैक्स, ईडी भेजी जा सके, पुलिस प्रशासन से निगरानी करवाई जा सके, इसलिए इन्हें कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची चाहिए। भाजपा को यह समझना होगा कि यह कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता है, उन्हें इस तरह से भाजपा प्रताडि़त नहीं कर सकेगी, सभी कार्यकर्ताओं को मजबूती से प्रतिरोध करना होगा, क्योंकि यह भाजपा की नौटंकी है। गांवों में आकर यदि कोई कानून के विरुद्ध कार्रवाई करेगा तो उसे माकूल जवाब कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता देंगे, कानून की बात का सम्मान होगा, लेकिन कानून के विरुद्ध धमकाने का कार्य हुआ तो कांग्रेस के सारे नेता अपने कार्यकर्ताओं के आगे ढाल बनकर खड़े हो जाएंगे।

 डोटसरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के शासन में जो जनकल्याणकारी कार्य हुए और भाजपा के शासन से तुलना की जाए तो कांग्रेस 90 प्रतिशत और भाजपा 10 प्रतिशत भी तुलना में नहीं रह सकेगी। कांग्रेस सरकार आमजन के लिए कार्य करती है, जनकल्याणकारी योजनाएं बनाती है और भाजपा केवल भ्रमित करने का कार्य करती है, उसे जनता से सरोकार नहीं है। सभी मिलकर कांग्रेस पार्टी को मजबूत बनायें और पंचायत चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को अधिक से अधिक मत देकर विजयी बनायें और भाजपा को सबक सिखायें।

इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि डोटासरा ने कहा था कि वर्ष 1959 में जिस स्थान से प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश में पंचायत राज की स्थापना की थी वहीं अपना जन्मदिन मनाऊंगा, इसलिए आज पंचायत राज कार्यकर्ता सम्मेलन डेगाना में आयोजित किया गया है। प्रदेश में भाजपा की सरकार हर मोर्चे पर विफल हो गई है, नगर निकाय के चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत बुरी तरह गिर गया, विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम हो गया है, लोकसभा चुनाव में मिले मतों के आधार पर भाजपा का मत 15 प्रतिशत गिर गया है और निकाय चुनाव में कांग्रेस पार्टी तथा भाजपा के मतों का अंतर 1 प्रतिशत से भी कम रह गया है, भाजपा चुनाव हार गई,

 जबकि शहरों के अंदर भाजपा अपने आप को ताकतवर मानती रही है। भाजपा राजस्थान के शहरों में भी चुनाव हार गई और इस हार को छुपाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट किया की प्रचण्ड जीत की भाजपा को बधाई, जबकि भाजपा शहरों में चुनाव हारी और जो निकायों के सभापति बनाए गए वह पुलिस और प्रशासन की सहायता से बनाए गए, प्रदेशभर में पूरी पुलिस एक ही काम में जुटी हुई थी और पार्षदों को पकड़ रही थी, सरकार के सारे विभाग भाजपा के लिए समर्थन जुटाने में लगे हुए थे,

 वास्तविकता तो यह है कि नगर निकाय चुनाव रिकॉर्ड के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को हराने का कार्य किया है। यह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की जीत है। आगामी पंचायत राज चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ कर कांग्रेस पार्टी को प्रदेश से भाजपा का कुशासन समाप्त करना होगा।

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