ऑक्टेव-2026 : एक भारत श्रेष्ठ भारत का सर्वोत्तम उदाहरण : Dy CM दीया कुमारी
जयपुर। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री, पर्यटन, वित्त एवं संस्कृति मंत्री दीया कुमारी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता से है। हमारी संस्कृति किसी एक भाषा, एक प्रदेश या एक परंपरा तक सीमित नहीं है। भारत की वास्तविक सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविध लोक परंपराओं, भाषाओं, संगीत, नृत्य, कला, शिल्प और जीवन-पद्धतियों में निहित है। पूर्वाेत्तर भारत इसी सांस्कृतिक विविधता का एक समृद्ध और महत्वपूर्ण अध्याय है।डिप्टी सीएम ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा आरआईसी, जयपुर के सहयोग से आयोजित किए जा रहे पूर्वोत्तर भारत पर केंद्रित ‘ऑक्टेव 2026’ के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार एक भारत-श्रेष्ठ भारत का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने ऑक्टेव 2026 के आयोजन के लिए पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ अश्विन दलवी को बधाई दी।इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ अश्विन एम दलवी ने मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम दीया कुमारी का स्वागत किया और उनका शॉल ओढ़ा कर अभिनंदन किया। इस अवसर पर आर आई सी के डायरेक्टर एन सी गोयल भी मौजूद रहे। लिपोकमार की कंडक्ट की गई काॅयर की प्रस्तुति में जब 16 सिंगर्स ने एक सुर में जय हो..., लाखों हैं यहां दिलवाले... जैसे सॉन्ग पेश किए गए
कार्यक्रम के दौरान क्वायर अलोबो नागा एंड द बैंड के साथ भी कॉयर ग्रुप की प्रस्तुति में पारंपरिक और समकालीन संगीत के अनूठे संगम ने संगीत प्रेमियों से खूब सराहना पाई। वहीं, ‘अलोबो नाग एंड द बैंड’ की प्रस्तुतियों ने संगीत रसिकों को झूमने पर विवश कर दिया।
जयपुर राइट्स ने न सिर्फ सुर से सुर मिलाया, बल्कि जमकर दाद भी दी। वहीं, लिपोकमार के रचित मेजेमसांगर नारो... की प्रस्तुति ने भी खूब वाहवाही लूटी। इसमें फूलों के मुरझाने और खिलने की प्रक्रिया को खूबसूरत शब्दाें में संजोया गया। पवित्रतम और जीवनदायिनी नदी गंगा को समर्पित लिपोकमार जुदिर की रचना ‘तबला’ की संगीतमय प्रस्तुति ने संगीत रसिकों को भाव विभोर कर दिया।
कार्यक्रम में स्वीडिश संगीत समूह ABBA के चर्चित गीतों का आकर्षक एकापेला मेडली भी प्रस्तुत किया गया। इसमें टेक ए चांस ऑन मी, डांसिंग क्वीन, डज़ योर मदर नो, मम्मा मिया, एसओएस मनी, द विनर्स टेक्स इट ऑल और थेंक्यू फॉर द म्यूजिक जैसी लोकप्रिय रचनाएं की बिना संगीत केवल स्वर प्रस्तुति ने संगीत प्रेमियों का मन मोह लिया। साथ ही, उम्मीद, शांति, करुणा और विश्वास का संदेश देने वाली पेशकश ‘द प्रेयर’ ने दिल के तारों को झंकृत कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान क्वायर अलोबो नागा एंड द बैंड के साथ भी कॉयर ग्रुप की प्रस्तुति में पारंपरिक और समकालीन संगीत के अनूठे संगम ने संगीत प्रेमियों से खूब सराहना पाई। वहीं, ‘अलोबो नाग एंड द बैंड’ की प्रस्तुतियों ने संगीत रसिकों को झूमने पर विवश कर दिया।
नॉर्थ ईस्ट के लोक नृत्यों सिंघी छाम (सिक्किम) ने जहां हिम शेरों से रूबरू करवाया, वहीं पुंग ढोल-ढोलक चोलम (मणिपुर) ने मणिपुरी कल्चर जीवंत दिखाया, तो, बिहू (असम) ने असम के रोंगाली बिहू त्योहार को स्टेज पर साकार कर दिया। इन लोक नृत्यों ने एक खास छाप जयपुर राइट्स के दिलों में छोड़ी। मंच संचालन मोहिता दीक्षित और गौरव शर्मा ने किया।
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