भारत ने 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी को लेकर तय किया अपना विजन

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : भारतीय ओलंपिक संघ ने इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की ओर से 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की दौड़ में शामिल शहरों और देशों के नामों की घोषणा का स्वागत किया। गुजरात के अहमदाबाद को केंद्र में रखते हुए भारत की ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की योजना पिछले 18 महीनों में आईओसी के साथ हुई बातचीत के माध्यम से तैयार की गई है।

भारत का विजन ‘राइजिंग टुगेदर’ इस विचार को उजागर करता है कि 2036 आपसी तरक्की का एक बड़ा मौका हो सकता है। इस दौरान, खेलों के माध्यम से भारत में हो रहा बदलाव और ओलंपिक मूवमेंट का भविष्य, खेलों की मेजबानी के जरिए एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत के लिए ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी खेलों को देश की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम् हिस्सा बनाने का बड़ा मौका होगी।

इसका उद्देश्य लाखों युवाओं को सिर्फ खेल देखने के बजाय खुद खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करना, लोगों को ज्यादा स्वस्थ और एक्टिव जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करना और खेलों को शिक्षा व करियर के अवसरों से जोड़ना है। भारत में खेलों की मेजबानी का उद्देश्य सिर्फ एक ग्लोबल इवेंट आयोजित करना नहीं है। इसके माध्यम से खेलों को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का और गहरा हिस्सा बनाने के साथ ही भारत की ऊर्जा, युवा शक्ति और समाज को बदलने में खेलों की ताकत पर उसके भरोसे को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

ओलंपिक मूवमेंट के लिए वर्ष 2036 में भारत में खेलों की मेजबानी एक नए दौर में जाने का मौका होगी। इससे ओलंपिक और पैरालंपिक मूवमेंट का जुड़ाव दुनिया की सबसे युवा, तेजी से आगे बढ़ रही और डिजिटल रूप से जुड़ी आबादी वाले देशों में से एक से होगा। इससे खेलों से जुड़ी कई नई संभावनाएँ सामने आएँगी। एक अरब से ज्यादा लोगों तक खेलों की पहुँच होगी और ओलंपिक परिवार से नए खिलाड़ी, नए दर्शक और नए पार्टनर जुड़ सकेंगे।

भारत और ओलंपिक मूवमेंट जब एक साथ, एक साझा उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेंगे, तो यह उनके इतिहास का एक खास मौका होगा। यह भारत के रंगों, संस्कृति और जीवन का उत्सव होगा और देश की अनोखी सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने लाएगा। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा, “वर्ष 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों को लेकर भारत के विजन और उम्मीदों को आईओसी से मिली पहचान हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है।

हमारे लिए ‘राइजिंग टुगेदर’ सिर्फ एक स्लोगन नहीं है। यह भारत की ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और विविधता को एक साझा ओलंपिक सपने से जोड़ने की हमारी प्रतिबद्धता है। वर्ष 2036 के लिए अपना विजन तैयार करते हुए हम ऐसे खेलों की मेजबानी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो एक युवा, गतिशील और तेजी से आगे बढ़ रहे भारत की झलक पेश करें। साथ ही, इससे ओलंपिक और पैरालंपिक मूवमेंट को दुनिया भर में नई पीढ़ियों, नए समुदायों और नई जगहों तक पहुँचने में भी मदद मिले।

उन्होंने कहा, “यदि हम अपने खिलाड़ियों, लोगों, शहरों और ओलंपिक व पैरालंपिक मूवमेंट के साथ मिलकर आगे बढ़ें, तो संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। और जब भारत आगे बढ़े, तो हम चाहते हैं कि दुनिया भी हमारे साथ आगे बढ़े। हम आईओसी के साथ अपनी बातचीत जारी रखने और अक्टूबर के अंत में पहली बार फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने अपनी योजना रखने को लेकर उत्साहित हैं।

भारत सरकार में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “वर्ष 2036 के लिए भारत की सोच एक सरल विचार पर आधारित है कि खेल हमारे देश के भविष्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी लाखों युवा भारतीयों को खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करेगी। इससे स्वस्थ और ज्यादा सक्रीय समुदाय बनाने में मदद मिलेगी और युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

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