खुद में खुद को जिंदा रख भीतर एक परिंदा रख
० Sushma Bhandari ० कण कण में विज्ञान कहाँ नहीं विज्ञान बताओ कहाँ नहीं विज्ञान भूत-भविष्य का ज्ञाता है , वर्तमान की शान भू गर्भ से लेकर ये अन्तरिक्ष तक जाये जैविक, भौतिक, मौसम और रसायन भी समझाये माटी के कण कण में सब है,पानी, हवा व आग करता है विज्ञान खुलासा, क्या है जीवन राग जीवन से मृत्यु तक का देता यही हिसाब क्या होती है मूल हकीकत क्या होता है ख़्वाब विविध समस्यायें हल करता सबका यही जवाब कण कण में विज्ञान छिपा है कण कण में विज्ञान ================================= ........परिंदा..... खुद में खुद को जिंदा रख भीतर एक परिंदा रख सभी लुटेरे बैठे हैं रिश्ते ज़रा चुनिंदा रख इतनी गहरी नींद न ले आँख जरा उनिंदा रख भीतर भी तो झांक ज़रा हरदम न परनिंदा रख जिसने रची है ये सृष्टि उसमें खुद को जिंदा रख ==================== अब पनघट सूने हुए , सूने हार श्रृंगार डगर -डगर सूनी हुई , दीखे न परिवार। तक-तक बाट निहारते ,कब आयें मेहमान जब से अपनापन गया , रूठी है मुस्कान।। मटक-मटक कर चल रहे, कान्हा मटकी फोड़ दरस दीवानी गोपियाँ, लगी हुई है होड़। =============================== अपनी - अपनी...