उत्तर प्रदेश में 'ज्ञानेश हटाओ, एस आई आर रद्द करो' आंदोलन का ऐलान
लखनऊ में 10 और 11 अक्टूबर को जनांदोलनों की दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम संयोजक डॉ. वीणा गुप्ता ने बताया कि बैठक में 15 राज्यों के जनांदोलनों और नागरिक समाज से जुड़े 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जनांदोलनों की बैठक में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एस आई आर रद्द करने को लेकर देश भर में चल रहे आंदोलनों का समर्थन करते हुए पुलिस दमन की तीव्र निंदा की गई ।बैठक में आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नागरिक समाज और जनांदोलनों की भूमिका , ‘ज्ञानेश हटाओ– एस आई आर रद्द करो’ की मांग को लेकर चल रहे संघर्षों को एकजुट और तेज करने, राष्ट्रव्यापी स्तर पर एक मजबूत और व्यापक जन-आंदोलन खड़ा करने जैसे मुद्दों पर सात समूहों में चर्चा के बाद सर्व सहमति से प्रस्ताव पारित किया गया।प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश में 'ज्ञानेश हटाओ, एस आई आर रद्द करो आंदोलन करने, वोटर लिस्ट से काटे गए ढाई करोड़ वोटरों का सोशल ऑडिट (जमीनी जांच) करने और "जहां खड़े हैं, वहीं जंतर मंतर है" के नारे के साथ प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। बैठक में कहा गया कि हमारा लक्ष्य देश भर में व्यापक और एकजुट जनांदोलन खड़ा करने के लिए प्रेरक शक्ति के रूप में काम करने, विभिन्न आंदोलनों के बीच संबंधों को मज़बूत करने का है।बैठक में भारत के लिए एक जन एजेंडा तैयार करने, नो एस आई आर प्लेटफार्म के साथ जुड़ने और 14 अक्टूबर की बैठक में शामिल होने का निर्णय लिया गया। उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर हुई बहस में चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट में सुधार के बिना चुनाव में शामिल होने को आत्मघाती बताते हुए विपक्षी राजनीतिक दलों से 'ज्ञानेश हटाओ, एस आई आर रद्द करो' आंदोलन को तेज करने की अपील की गई।
वर्तमान जनआंदोलन को जे पी आंदोलन पार्ट 2 बतलाते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण को याद किया गया। प्रतिनिधियों ने बिलारी के आंदोलनकारी राकेश रफीक और प्रो कमल मित्र चिनॉय को श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात,
हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और केरल के लगभग 68 संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा में परकला प्रभाकर, तीस्ता सीतलवाड़, थॉमस फ्रेंको, तारा राव, रमेश पटनायक, कृष्ण प्रसाद, डॉ सुनीलम , प्रो रूपरेखा वर्मा, प्रो. रमेश दीक्षित,पूर्व आई ए एस हरीश चंद्र, कैप्टन. दिनेश चंद्र, डॉ.वीणा गुप्ता, संजीव सिन्हा, रामधीरज, अनूप श्रमिक,
जागृति राही, डॉ आनन्द प्रकाश तिवारी, मुजाहिद, मंथन, शाहिद कमाल, राघवेंद्र, आलोक, योगेंद्र यादव, अरविन्द मुर्ति, ज्ञानेंद्र, अरूण खोटे, कुलदीप बौद्ध, ऊषा विश्वकर्मा, आलोक, शशिकांत, ऊषा विश्वकर्मा, राजीव यादव, शांथम, गुफरान, सत्यदेव पाल, रफीक ज़माजी, अनुभव दास शास्त्री, रामप्रवेश यादव, प्रदीप शर्मा, सुरेंद्र कुमार जैसे प्रमुख जनांदोलनकारी शामिल हुए।
बैठक में देशभर के जनांदोलनों से जुड़े नेताओं ने बिलारी (मुरादाबाद) के क्रांतिकारी, आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ राकेश रफीक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। देशभर के 15 राज्यों से आए जनांदोलनों के 250 साथियों ने उन्हें मार्क्स, गांधी और जयप्रकाश नारायण के विचारों को आगे ले जाने वाला योद्धा बताते हुए गत 40 वर्षों के संघर्षों से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए।
आंगनबाड़ी यूनियन की डॉ वीणा गुप्ता, झारखंड के मंथन बिहार के शाहिद कमाल, वाराणसी की जागृति राही और अनूप श्रमिक, बलिया के राघवेंद्र, लखनऊ के आलोक और योगेंद्र यादव, मऊ के अरविन्द मुर्ति, यवतमाल के ज्ञानेंद्र आदि साथियों ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया।
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष,पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने कहा कि डॉ राकेश रफीक व्यवस्था परिवर्तन के लिए 40 वर्षों तक सतत युवाओं को वैचारिक तौर पर प्रशिक्षित करते रहे। डॉ रफीक ने किसान आंदोलन, अन्ना आंदोलन में तो बढ़ चढ़कर भाग लिया ही साथ ही देश भर के अलग-अलग राज्यों में होने वाले आंदोलनों का जमीनी स्तर पर समर्थन भी किया।
उन्होंने कहा कि वें देश के उन चुनिंदा नेताओं में थे जिनकी वैचारिक स्पष्टता थी, जमीनी स्तर पर पकड़ थी तथा देशभर के आंदोलनकारियों से व्यक्तिगत रिश्ता भी था। सभी वक्ताओं ने कहा कि डॉ राकेश रफीक ने डॉ मीनाक्षी सखी के साथ आजीवन जीवनसाथी के तौर पर एक आदर्श प्रस्तुत किया, सामाजिक मान्यताओं और रूढ़ियों को दोनों ने मिलकर चुनौती दी।
बैठक में देशभर के जनांदोलनों से जुड़े नेताओं ने बिलारी (मुरादाबाद) के क्रांतिकारी, आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ राकेश रफीक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। देशभर के 15 राज्यों से आए जनांदोलनों के 250 साथियों ने उन्हें मार्क्स, गांधी और जयप्रकाश नारायण के विचारों को आगे ले जाने वाला योद्धा बताते हुए गत 40 वर्षों के संघर्षों से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए।
आंगनबाड़ी यूनियन की डॉ वीणा गुप्ता, झारखंड के मंथन बिहार के शाहिद कमाल, वाराणसी की जागृति राही और अनूप श्रमिक, बलिया के राघवेंद्र, लखनऊ के आलोक और योगेंद्र यादव, मऊ के अरविन्द मुर्ति, यवतमाल के ज्ञानेंद्र आदि साथियों ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया।
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष,पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने कहा कि डॉ राकेश रफीक व्यवस्था परिवर्तन के लिए 40 वर्षों तक सतत युवाओं को वैचारिक तौर पर प्रशिक्षित करते रहे। डॉ रफीक ने किसान आंदोलन, अन्ना आंदोलन में तो बढ़ चढ़कर भाग लिया ही साथ ही देश भर के अलग-अलग राज्यों में होने वाले आंदोलनों का जमीनी स्तर पर समर्थन भी किया।
उन्होंने कहा कि वें देश के उन चुनिंदा नेताओं में थे जिनकी वैचारिक स्पष्टता थी, जमीनी स्तर पर पकड़ थी तथा देशभर के आंदोलनकारियों से व्यक्तिगत रिश्ता भी था। सभी वक्ताओं ने कहा कि डॉ राकेश रफीक ने डॉ मीनाक्षी सखी के साथ आजीवन जीवनसाथी के तौर पर एक आदर्श प्रस्तुत किया, सामाजिक मान्यताओं और रूढ़ियों को दोनों ने मिलकर चुनौती दी।





टिप्पणियाँ