माहिया तेरे लिए " पुस्तक से माहिया विधा में कुछ गीत
० सुषमा भंडारी ०
माहिया तेरे लिए " पुस्तक से माहिया विधा में कुछ गीत प्रस्तुत हैं। माहिया - पंजाबी का शब्द है जिसका अर्थ है "मीत" अर्थात् " मित्र"। मित्र कोई भी हो सकता है - परमात्मा , पति , प्रेमी, या फिर सखी - सहेली , प्रकृति। पंजाब की मिट्टी की खुशबू ,सौंधी - सौंधी गंध लिए है। ये तीन - तीन अवलियों ( पंक्तियों) की छोटी कविताएं जीवन के राग से आप्लावित हैं , जीवनानुभूतियों से भरी हैं । ये त्रिवालियां जन - जन की भाषा बोली हैं इसलिए इनमें अपनापन झलकता है।
छंद विधान के अनुसार माहिया तीन पंक्तियों का मात्रिक लयात्मक , गेयात्मक गीत ( पंजाब का टप्पा) है ।
प्रथम पंक्ति में 12 मात्रा,द्वितीय पंक्ति में 10 मात्रा एवं तृतीय पंक्ति में पुनः 12 मात्राओं का निर्वहन करना होता है । इसकी एक खास लय है जो अक्सर सब ने सुनी होगी । खेतों में काम करते किसान , प्रेमी जोड़े इसे गुनगुनाते हैं इसका उदाहरण कई चलचित्रों ( फिल्मों) में है।पंजाब में ब्याह - शादियों में इन गीतों को गाना आम बात है। इन्हीं गीतों सवाल, जवाब वाली शैली भी पंजाब में मशहूर है । माहिया , त्रिवालियां , गीत , अहसास --पुस्तक " माहिया तेरे लिए " से प्रस्तुत --
रुत है बहारों की
टोली घूम रही
मेले में यारो की
कुहरा - सा छाया है
शख्स अकेला है
फिर भी भरमाया है
आशीष सभी पायें
माँ के पहलू में
बनकर बेटा आयें
फूलों का कहना है
संग में काँटे है
ये मेरा गहना है
सपनो में ना आना
आते हो जब तुम
करते हो दीवाना
दुनिया का मेला है
बेशक साथ रहें
हर एक अकेला है
गंगा जो बहती है
चलना ही जीवन
ये सब से कहती है
जब आंखे भर आई
समझो पीड़ा ने
फिर से ली अंगड़ाई
दुनिया माया नगरी
देखो तैर रही
पापों की अब गगरी
खोकर भी पाते हैं
लोग यहाँ पर वो
जो प्यार निभाते हैं
माहिया तेरे लिए " पुस्तक से माहिया विधा में कुछ गीत प्रस्तुत हैं। माहिया - पंजाबी का शब्द है जिसका अर्थ है "मीत" अर्थात् " मित्र"। मित्र कोई भी हो सकता है - परमात्मा , पति , प्रेमी, या फिर सखी - सहेली , प्रकृति। पंजाब की मिट्टी की खुशबू ,सौंधी - सौंधी गंध लिए है। ये तीन - तीन अवलियों ( पंक्तियों) की छोटी कविताएं जीवन के राग से आप्लावित हैं , जीवनानुभूतियों से भरी हैं । ये त्रिवालियां जन - जन की भाषा बोली हैं इसलिए इनमें अपनापन झलकता है।
छंद विधान के अनुसार माहिया तीन पंक्तियों का मात्रिक लयात्मक , गेयात्मक गीत ( पंजाब का टप्पा) है ।
प्रथम पंक्ति में 12 मात्रा,द्वितीय पंक्ति में 10 मात्रा एवं तृतीय पंक्ति में पुनः 12 मात्राओं का निर्वहन करना होता है । इसकी एक खास लय है जो अक्सर सब ने सुनी होगी । खेतों में काम करते किसान , प्रेमी जोड़े इसे गुनगुनाते हैं इसका उदाहरण कई चलचित्रों ( फिल्मों) में है।पंजाब में ब्याह - शादियों में इन गीतों को गाना आम बात है। इन्हीं गीतों सवाल, जवाब वाली शैली भी पंजाब में मशहूर है । माहिया , त्रिवालियां , गीत , अहसास --पुस्तक " माहिया तेरे लिए " से प्रस्तुत --
रुत है बहारों की
टोली घूम रही
मेले में यारो की
कुहरा - सा छाया है
शख्स अकेला है
फिर भी भरमाया है
आशीष सभी पायें
माँ के पहलू में
बनकर बेटा आयें
फूलों का कहना है
संग में काँटे है
ये मेरा गहना है
सपनो में ना आना
आते हो जब तुम
करते हो दीवाना
दुनिया का मेला है
बेशक साथ रहें
हर एक अकेला है
गंगा जो बहती है
चलना ही जीवन
ये सब से कहती है
जब आंखे भर आई
समझो पीड़ा ने
फिर से ली अंगड़ाई
दुनिया माया नगरी
देखो तैर रही
पापों की अब गगरी
खोकर भी पाते हैं
लोग यहाँ पर वो
जो प्यार निभाते हैं


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