मॉस्को मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कार्यवाहक कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल ने किया राजस्थली एम्पोरियम,जयपुर का दौरा

० आशा पटेल ० 
जयपुर। मॉस्को मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कार्यवाहक कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल इगोर अनातोलेविच सेरित्स्की ने जयपुर स्थित राजस्थली एम्पोरियम का दौरा किया। इस अवसर पर राजस्थली एम्पोरियम की टीम द्वारा उनका तिलक-चंदन लगाकर भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत एवं अभिनंदन किया।
 लेफ्टिनेंट जनरल सेरित्स्की ने एम्पोरियम का भ्रमण किया तथा राजस्थान की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा, पारंपरिक कलाकृतियों और हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन किया। यहां प्रदर्शित उत्पादों की कलात्मक बारीकियों, उत्कृष्ट शिल्पकला और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान ने उनका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने विभिन्न उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई और उनकी सराहना की।
इस दौरान उन्होंने पुरस्कार प्राप्त कारीगरों (Awarded Artisans) के साथ भी संवाद किया और उनके द्वारा तैयार किए जा रहे पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों, शिल्पकला की बारीकियों तथा राजस्थान की समृद्ध कलात्मक विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त की। कारीगरों के साथ हुई इस चर्चा ने राजस्थान की पारंपरिक कला, पीढ़ियों से चली आ रही शिल्प परंपराओं और स्थानीय कारीगरों के कौशल को समझने का अवसर प्रदान किया।

दौरे का विशेष आकर्षण रहा ‘हवा महल स्मृति-चिह्न फ्रेम’ (Hawa Mahal Souvenir Frame), जिसे राजस्थली एम्पोरियम की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल इगोर अनातोलेविच सेरित्स्की को भेंट किया गया। जयपुर की विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर हवा महल से प्रेरित यह विशेष स्मृति-चिह्न शहर की स्थापत्य कला, राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला का सुंदर प्रतिनिधित्व करता है। राजस्थली एम्पोरियम ने राजस्थान की कला एवं संस्कृति की एक अनूठी झलक उन्हें स्मृति-स्वरूप प्रदान की।

राजस्थली एम्पोरियम राजस्थान की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें व्यापक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। हवा महल स्मृति-चिह्न फ्रेम जैसे विशिष्ट उत्पाद प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर और हस्तशिल्प को एक साथ प्रस्तुत करते हुए राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाते हैं।

दौरे के समापन पर राजस्थली एम्पोरियम की टीम द्वारा लेफ्टिनेंट जनरल इगोर अनातोलेविच सेरित्स्की को स्मृति-चिह्न भेंट कर राजस्थान की कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प के प्रति सम्मान एवं आत्मीयता का प्रतीक रहा। यह दौरा राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उत्कृष्ट हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।

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