श्रीकांत सोमानी द्वारा "लद्दाख की पवित्र कला : लुप्त होते खजाने ( Sacred Art of Ladakh: Fading Treasures ) पुस्तक का विमोचन
० आनंद चौधरी ० नई दिल्ली,उद्योगपति, रिसर्चर,फोटोग्राफर और लेखक श्रीकांत सोमानी ने दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी पुस्तक "लद्दाख की पवित्र कला: लुप्त होते खजाने (Sacred Art of Ladakh: Fading Treasures) का विमोचन किया। नियोगी बुक्स द्वारा प्रकाशित यह कॉफी-टेबल बुक लद्दाख की पवित्र बौद्ध कला, वास्तुकला और आध्यात्मिक परंपराओं को समेटती है। यह उस अनमोल सांस्कृतिक विरासत की ओर ध्यान आकर्षित करती है, जिसके धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने और हमेशा के लिए लुप्त हो जाने का खतरा है। श्रीकांत सोमानी ने चार दशकों से भी अधिक समय में लद्दाख की नौ यात्राएं कीं। उनकी पहली यात्रा 1981 में हुई थी। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने देखा कि कई कलाकृतियों के रंग फीके पड़ रहे थे, दीवारों पर बने चित्र पानी से खराब हो रहे थे और दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा था। इससे पीढ़ियों पहले अज्ञात कलाकारों द्वारा बनाई गई इन कलाकृतियों को नुकसान पहुंच रहा था। ऐसे में फोटोग्राफी उनके लिए केवल कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं रही, बल्कि इन अनमोल धरोहरों को तस्वीरों में सहेजने का जरिया बन गई, जो शायद भव...