हिंदी व्यंजनों की कहानी

० 
सुषमा भंडारी ० 
( क ) कलम आज बहुत ख़ुश थी।
आज कलम ने बहुत अच्छी कहानी लिखी।
( ख ) ख़बर पूरे जंगल में फैल गई थी कि आज ' गधा ' राजा बन रहा है ।
( ग) गधा , राजा ! शेर तो शर्म से अपनी माँद में जाकर सो गया था

( घ ) घन - घन , घन बरसने ही वाले थे। घन , यानि बादल।
( ड़ ) ड़ ड़ ड़ ड़ ड़ ड़ ड़ ड़ ड़ ज़ोरदार आवाज़ के साथ बादल गरजने लगे।
तभी ,
(च ) चम्पू हाथी झूमता - झूमता आया । क्या हुआ ? आज शेर राजा चुप क्यूँ है? मगर ! शेर नहीं बोला ।
( छ ) छप -छप -छपाक - छपाक - छप बूंदें गिरने लगीं ।
( ज ) जल ही जल । लगता था जंगल जलमग्न हो गया ।
( झ ) झरने बहने लगे, लग रहा था झरनों ने सुंदर राग छेड़ दिया हो ।
झरने यानि पहाड़ों से गिरता हुआ पानी । समझ आया बच्चों !!

( ञ ) ञ- ञ- ञ- ञ- ञ- ञ-ञ का स्वर गूँज रहा था ।
( ट ) टप- टप- टप- टप पत्तों से बूँदे झर रही थी।
( ठ ) ठंडी - ठंडी हवा बहने लगी ।

( ड ) डालियों पर बंदर वो अन्य पक्षी चिपक कर बैठे थे ।
( ढ ) दूर ढलान पर खरगोशों की टोली उछल - कूद कर रही थी ।
( ण ) ण - अ - अ- अ- ओमकार का जाप पत्ता - पत्ता सुन रहा था क्यूँकि मौसम सुहाना हो गया था
( त ) तरुवर यानि पेड़ सभी मस्त थे तभी,

( थ ) थर्र - थर्र काँपती हुई चिड़िया आई। सुनो, हाथी भाई, गदहे भाई, मुझे ठंड लग रही है, तूफ़ान में मेरा घर भी टूट गया है , मैं क्या करूँ? कहाँ जाऊँ?
( द ) सबसे पहले दवा लेनी होगी।

( ध ) धनिया गिलहरी ने झट से कहा।
( न ) नहीं - नहीं गिलहरी मौसी तुम्हारी दवा , वो काढ़ा बहुत कड़वा होता है, मैं नहीं पीऊंगी।
( प ) पपीता भी खिलाऊंगी मेरे घर चलो , पपीता तो मीठा होता है , तुम्हे पसंद भी है।

( फ ) फल । हाँ फल मुझे अच्छे लगते हैं। नानी कहती थी बच्चों, बड़ों , बूढ़ो सभी को फल खाने चाहिए, स्वास्थ्य अच्छा रहता है। मगर , ताज़ा और धुले हुए , चिड़िया ने कहा।
( ब ) बत्तख तालाब से तैरती हुई आई क्वक - क्वक - क्वक - क्वक -हाँ -हाँ फल मुझे भी बहुत पसंद हैं।
(भ )भरा - भरा पेड़ ताज़ा- ताज़ा आमों से खूबसूरत लग रहा था तभी मक्खी भिनभिनाती हुई मंडराने लगी।
( म ) मक्खी रानी तुम क्यूँ आई हो?

( य ) यम्मी - यम्मी आम , जब तुम सब खा लोगे तब मैं भी अपना पेट भरूंगी। पेट भरूंगी।
( र ) रहने दो मक्खी रानी। दूर हटो , दूर हटो। ये क्या ? लगातार एक लम्बी तान........... ये कौन है ?
( ल ) लंबी तान । देखा तो वहीं कोयल पेड़ पर बैठ कर मक्खी के नाम की एक लम्बी तान छेड़ रही थी।
म -म्म - म -- मक्खी, म- म्म- म- म - मक्खी।

( व ) वह गा रही थी मक्खी इधर से उधर नाच रही थी, घूम रही थी।
चिड़िया बोली , क्या मक्खी रानी तुम हमारे सब फल , खाना जूठा कर देती हो जाओ यहाँ से.......
तुम्हारी जूठन से बीमारी फैलती है।

( श ) शराफत तो है ही नहीं अपना खाना क्यूँ नहीं खाती? मक्खी रानी ।
तुम सब अपना खाना , फल जब खुला छोड़ देते हो तो मुझे लगता है मेरे लिए है इसलिए मैं खा लेती हूँ ।
आप ढककर रखोगे तो मुझे लगेगा ये आपका है , मैं नहीं खाऊँगी ।

सभी उपस्थित साथियों ने प्रण लिया कि आज के बाद खाना हमेशा ढककर रखेंगे ।
( ष ) सबने षटकोण की तरह घेरा बनाया , तालियाँ बजाई और हँसने लगे।
( स ) सब ने स्वस्थ रहने का नया पाठ पढ़ा था , सभी बहुत खुश थे।

( ह ) " हम स्वच्छ रहेंगे , हम स्वस्थ रहेंगे " का नारा जंगल में गूंजने लगा।
( क्ष ) क्षमा करो मुझे , क्षमा करो मैं भी तुम्हारी दोस्त हूँ, मैं तुम्हारा खाना जूठा नहीं करुँगी ।
( त्र ) त्रिकालदर्शी भगवान सब देख रहे थे , वे खुश थे। वे खुश हुए देखकर कि जंगल में खुशहाली है।
( ज्ञ ) सच ! शिक्षा ही सबसे बड़ा ज्ञान है।

टिप्पणियाँ

बाल रचना ही पहला कदम है मेरा
Parinita Sinha ने कहा…
आप ने वर्णमाला को कहानी में परिवर्तित कर आपनसरल व सार्थक बना दिया । बच्चों के लिए इसे याद करना सुविधाजनक होगा ।
बहुत अच्छा प्रयास है।

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