संविधान,सद्भाव और वर्तमान परिस्थितियाँ' संगोष्ठी में प्रशांत भूषण ने खोले राज

० आशा पटेल ० 
जयपुर। पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर में फोरम फॉर डेमोक्रेसी एण्ड कम्युनल एमिटी (एफडीसीए) द्वारा 'संविधान,सद्भाव और वर्तमान परिस्थितियाँ' विषय पर आयोजित सिंपोजियम सम्पन्न् हुई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट प्रशांत भूषण एवं मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के प्रवक्ता डॉ.सैयद कासिम रसूल इलियास थे।
डॉ.इकबाल ने अन्याय पर समाज के मौन पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि देश में अलगाव को सुनियोजित ढंग से बढ़ाया जा रहा है तथा देश की एकता की बजाय देश में एकरूपता का प्रयास किया जा रहा है। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि मौजूदा सरकार सुनियोजित ढंग से अलग अलग पैतरे अपनाकर संविधान इस तरह से कमजोर कर रही है कि संविधान दिखाई तो दे परन्तु वो प्रभावहीन हो जाए। भूषण के अनुसार मौजूदा सत्ता ने देश में अलगाव बढ़ाया है,कानून को ताक पर रखकर बुलडोजर व एन्काउन्टर को प्रोत्साहित किया है 
तथा लोगों में नफरत व कुण्ठा को उभारा है तथा कोलेजियम सिस्टम में घुसपैठ करके तथा न्यायधीशों के खिलाफ़ डोजियर तैयार करके न्यायपालिका सहित सभी संवैधानिक संस्थाओं के मुखियाओं को ब्लैकमेलिंग के माध्यम से अन्याय व गलत कामों में शामिल होने या चुप रहने के लिए मजबूर कर दिया है। संसद में बहस नहीं होती है,50—50 कानून बिना बहस के शोर मचाकर मनमाने ढंग से एक ही दिन में पास मान लिए जाते हैं।
एसआईआर में एक साफ्टवेयर के माध्यम से देश भर के ईआरओ को इस तरह से अपंग कर दिया गया कि पूरा देश दंग है। चुनाव आयोग वोट चोरी में लिप्त है, ई.वी.एम. व एसआईआर उसके सबसे मजबूत हथियार हैं। विपक्ष कमजोर है लेकिन युवाओं व सिविल सोसाईटी से देश को काफी उम्मीद है, एनडीए समर्थक दलों द्वारा समर्थन वापसी की एवं खुद बीजेपी के सांसदों की अन्तरआत्मा के जागने की उम्मीद की जा सकती है।
मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के प्रवक्ता डॉ.सैयद कासिम रसूल इलियास ने विभिन्नता में एकता को संविधान का चमत्कार बताते हुए कहा कि संविधान में कानून के शासन के माध्यम से समता,न्याय व बंधुत्व पर आधारित व्यवस्था अपनाई गई थी जिसमें अलगाव को तिरस्कृत व एकता को पुरस्कृत करने की मंशा थी। कानून निर्माण की प्रक्रिया में सिविल सोसाईटी की अनदेखी ने भी जनता की समस्याओं को बढ़ाया है।

 चुनाव चोरी द्वारा सत्ता हथियाने एवं उसी सत्ता द्वारा जनता को विभाजित करके हिन्दू राष्ट्र का झांसा देकर पूंजीवादीयों की सत्ता स्थापित करने की मंशा रखने वाली मौजूदा सत्ता देश में एकता नहीं एकरूपता चाहती है जोकि ना सिर्फ प्रकृति के खिलाफ है वरन् आत्मघाती भी है। अध्यक्षीय भाषण देते हुए सवाई सिंह ने कहा मौजूदा सत्ता के सभी दावों की पोल खुल चुकी है, जनता बुरी तरह त्रस्त है देशवासियों को एक बार फिर से नई आजादी के संघर्ष के लिए कमर कस लेनी चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व न्यायाधीश टेकचन्द राहुल, जॉन मैथ्यू, मोहम्मद नाजीमुद्दीन,प्रो.बी.एम.शर्मा , सुमित्रा चौपड़ा,हाफिज मंसूर अली,फादर विजय पाल, संदीप होशियंगाबाद, एडवोकेट प्रेमकिशन शर्मा सहित अनेक ​चिंतकों ने अपने विचार साझा किए। मंच संचालन बसंत हरियाणा ने किया व पत्रकार अनिल यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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