राजस्थान में SIR के दौरान 41.85 लाख नाम वोटर लिस्ट से बाहर : अलका लांबा

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में हुए बड़े बदलावों पर सवाल उठाए और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली कांग्रेस की ‘चलो दिल्ली – वोट चोर, गद्दी छोड़’ महारैली में राजस्थान की जनता से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।
अलका लांबा ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है। मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना जरूरी है, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि इस प्रक्रिया में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से न छूटे और कोई भी व्यक्ति अपने मताधिकार से वंचित न हो। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधित करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को राज्य में 5,46,56,215 मतदाता दर्ज थे। 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में 5,04,71,324 मतदाता शामिल थे। इस प्रकार प्रारूप सूची में 41,84,891 नाम शामिल नहीं थे। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों में : लगभग 8.75 लाख नाम मृत मतदाताओं की श्रेणी में रखे गए। लगभग 29.6 लाख नाम स्थानांतरित या अनुपस्थित मतदाताओं की श्रेणी में रखे गए। लगभग 3.44 लाख नाम एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत होने की श्रेणी में रखे गए।
अलका लांबा ने कहा कि इन आंकड़ों की पारदर्शी जांच और पात्र मतदाताओं के नामों का सत्यापन बेहद जरूरी है। स्थानांतरित या अनुपस्थित पाए जाने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि कोई व्यक्ति मतदाता बनने के योग्य नहीं है। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने तथा अपना नाम सूची में शामिल कराने का पूरा अवसर मिले।

21 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार राजस्थान में कुल 5,15,19,929 मतदाता दर्ज थे। प्रारंभिक संख्या की तुलना में 31,36,286 मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई। हालांकि, प्रारूप सूची के बाद दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान 12,91,365 नए नाम जोड़े गए और 2,42,760 नाम हटाए गए। इस अवधि में कुल 10,48,605 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई।

अलका लांबा ने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया लगातार समीक्षा और सुधार की मांग करती है। कांग्रेस की मांग है कि प्रत्येक जिले में नाम हटाने के कारणों, सत्यापन की स्थिति, शिकायतों के निस्तारण और दोबारा जोड़े गए पात्र मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक की जाए। अंतिम मतदाता सूची में राजस्थान में 2,69,57,881 पुरुष, 2,45,61,486 महिला और 562 तृतीय लिंग के मतदाता दर्ज थे। प्रारूप सूची के बाद 18–19 वर्ष आयु वर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या में 4,35,061 की वृद्धि दर्ज हुई।

अलका लांबा ने कहा कि महिला मतदाताओं, युवाओं, प्रवासी श्रमिकों और उन नागरिकों के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए जो काम, शिक्षा या पारिवारिक कारणों से अपने मूल निवास स्थान पर उपलब्ध नहीं रहते। किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने की स्थिति में उसे समय पर सूचना, सुनवाई और अपील का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला कांग्रेस मतदाता जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं सहित सभी पात्र नागरिकों को अपना नाम मतदाता सूची में जांचने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

अलका लांबा ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता में जनता का विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। SIR और मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों पर तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाना चाहिए तथा किसी भी अनियमितता की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कांग्रेस की मांग दोहराते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों का संतोषजनक समाधान होना चाहिए। लोकतंत्र में जनता के जनादेश और मताधिकार की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अलका लांबा ने राजस्थान की जनता, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, महिला कांग्रेस की बहनों, युवाओं और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों से अपील की कि वे 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘चलो दिल्ली – वोट चोर, गद्दी छोड़’ महारैली में शामिल हों। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मतदाता अधिकारों, पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही के लिए आवाज उठाने का अवसर है।

उन्होंने कहा हमारी मांग स्पष्ट है हर पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित हो, मतदाता सूची में पारदर्शिता हो और हर गंभीर शिकायत का निष्पक्ष निस्तारण हो। राजस्थान की जनता से मेरी अपील है कि 1 नवंबर को दिल्ली पहुंचकर लोकतंत्र और अपने मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करें।

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