नदियाँ,सागर,ताल सारे हो रहे हैं सब जवां

० 
सुषमा भंडारी ० 
तेरे करीब रहूँ या कि तुझसे दूर रहूँ
तेरा ख्याल मेरे आस - पास रहता है

मेरी वफ़ा का सिला इस तरह मिला तुझसे
मेरी नफ़स में ही तू बन सुवास रहता है
नफ़स=साँस, श्वास।

तेरे बगैर बता एतबार किस पे करूँ
सही लगे है वही तू जो खास कहता है
गया है रूठ के मुझसे वो जबसे दूर कहीं
मेरा वो यार मेरी बनके प्यास रहता है
तुझे तलाश करूं या कि खुद मैं खो जाऊं
यही ख्याल मेरे दिल में खास रहता है
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रुत सुहानी सी लगे है तू जो मेरे साथ है
यूँ लगे बहकी हवायें गा रहा प्रभात है __

धानी चूनर में लिपट कर ये धरा मस्ता रही
रंग बदले उर्वरा भी और कलियाँ गा रही
फूलों पे यौवन है आया कैसी ये बरसात है
यूँ लगे बहकी____

नदियाँ , सागर ,ताल सारे हो रहे हैं सब जवां
चांद तारे भी सभी संग, चल दिया ज्यूँ कारवाँ
है खुशी ऐसी कि लागे, जगमगाती रात है
यूँ लगे बहकी_____

अपनी धूनी में मगन हैं, साधु - संत और पीर भी
पंछी हैं आज़ाद नभ में, संग न अब जंजीर भी
टूटी हैं खामोशियाँ सब,तू जो मेरे साथ है
यूँ लगे बहकी हवायें ___
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नन्ही बूंद न समझो मुझको
मुझमें छिपा है गहरा सागर
युग - युगों की छिपी कहानी
तीनों लोक हैं मेरे अंदर ,अश्क कहो या मुझको आंसू __

भावों भरी अनेकों सरिता
धाराएं अनगिन हैं मुझमें
जब चाहें ठहरें पलकों पर
जब चाहें बह जाएं झर - झर
तीनों लोक हैं मेरे अंदर ,अश्क कहो या मुझको आंसू _

आंखों का ये दर्पण देखो
सच्चा एक समर्पण देखो
देखो जीवन एक समंदर
तीनों लोक हैं मेरे अंदर, अश्क कहो या मुझको आंसू __

 बेशक सागर खारा हूँ मैं
लेकिन सबसे प्यारा हूँ मैं
सुख दुःख दोनों का मैं सरवर
तीनों लोक हैं मेरे अंदर ,अश्क कहो या मुझको आंसू___

सुख का हरइक पल जीता हूँ
दुःख में सारे ग़म पीता हूँ
हूँ मैं भाव भरा इक तरुवर
तीनों लोक हैं मेरे अंदर , अश्क कहो या मुझको आंसू___
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सब के राम प्रभु , भगवान हरि
स्वागत में नैन बिछाऊँ मैं------
हाँ । गीत राम के गाऊँ मैं------

जाने कितने युग बीत गये
कभी भरे कभी हम रीत गये
मन मंदिर के हो देव तुम्ही
पल- पल तुमको समझाऊँ मैं-----

स्वागत में नैन बिछाऊँ मैं-------
हाँ । गीत राम के गाऊँ मैं-------
हो स्वांस - स्वांस में प्रभु जी तुम
फिर कैसे कह दूँ हो गये गुम
अब राम लल्ला बन आओ तुम

ये अयोध्या खूब सजाऊँ मैं-----
स्वागत में नैन बिछाऊँ मैं-----
हाँ। गीत राम के गाऊँ मैं-----

 तुम ही हो मेरे श्री हरि
कण- कण में वास तुम्हारा है
तुम जगन्नाथ , तुम नारायण
प्रभु दर्शन तेरा पाऊँ मैं-------

स्वागत में नैन बिछाऊं मैं__
हां। गीत राम के गाऊं मैं__
घर- घर फिर से दीवाली हो
कोई रात न दुःख से काली हो

दिन विरह के सारे बीत गये
प्रभु दर्शन तेरा पाऊँ मैं-------
स्वागत में नैन बिछाऊँ मैं------
हाँ। गीत राम के गाऊँ मैं----

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