दिल्ली में सुरजीत सिंह जोबन की स्मृति को समर्पित राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली : पत्रकार,साहित्यकार,कवि,समाजसेवी,राजनितिक-धार्मिक-सांस्कृतिक व्यक्तित्वों वाले, सरदार सुरजीत सिंह जोबन की चौथी पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में,'अहिन्दी भाषी हिन्दी लेखक संघ',दिल्ली एवं 'साहित्य कलश' पटियाला के तत्वावधान में,उनके परिवार चरनजीत कौर (पत्नी), सोनू (बड़े पुत्र मनिंदर जीत सिंह) जोबन,हरजीत कौर बबली (पुत्री),वरिंदर जीत जोबन (छोटे पुत्र) व अन्य सम्बन्धियों द्वारा दिल्ली के वाई.एम.सी.ए. (YMCA) के सभागार में उनकी स्मृति को समर्पित 'राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन' का आयोजन किया गया।
आम आदमी पार्टी के सौरभ भारद्वाज मुख्य अतिथि (पूर्व मंत्री,दिल्ली सरकार) रहे और वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ सुभाष वसिष्ठ विशिष्ट अतिथि रहे। मंचासीन रहे -- डाॅ दयाराम मौर्य 'रत्न', अनिल कुलश्रेष्ठ, सविता चड्ढा,डाॅ अजय तिवारी, प्रियंका सोनी,डाॅगुरविंदर सिंह, हरमिंदर पाल और के के भसीन उपस्थित थे ।
विशिष्ट अतिथि के रूप में जे.पी.अग्रवाल( पूर्व सांसद), विनय आर्य (महामंत्री,आर्य प्रतिनिधि सभा),संत विजेंद्र दास (प्रमुख,गुलाबदासी सम्प्रदाय), चमनजीत सिंह लाल (विश्वविख्यात गुरुनानक प्रचारक),जगद्गुरु  कृष्ण साह विद्यार्थी (पीठासीन, भगवान वाल्मीकि पीठ व आश्रम),फ़ादर डाॅ आर.आर.भास्कर( प्रतिनिधि -- चर्च ऑफ़ नार्दर्न इंडिया), के.सी.रवि. (प्रमुख -- मानव सेवा संघ) तथा प्रतिनिधि-नामधारी सम्प्रदाय, पवन (दिल्ली हिन्दी अकादमी) मौजूद थे । संस्था की ओर से मुख्य अतिथि और सभी विशिष्ट अतिथियों का शाॅल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर सुरजीत जोबन की पुत्री हरजीत कौर बबली की,अपने पिता की स्मृति में, प्रकाशित पुस्तक 'मीठी यादें' का अतिथियों द्वारा लोकार्पण भी किया गया। समारोह में दिल्ली,पंजाब,हरियाणा,जम्मू, हिमाचल, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र,केरल आदि राज्यों के विभिन्न शहरों से  लोगों ने शिरकत की । संस्था की ओर से बेल्हा (प्रताप गढ़,उ.प्र.) के वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ दयाराम मौर्य रत्न को 'सुरजीत सिंह जोबन स्मृति राष्ट्रीय गौरव सम्मान' से और उपस्थित सभी साहित्यकारों को सौरभ भारद्वाज,डाॅ सुभाष वसिष्ठ और विनय के हाथों सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन में कवियों ने गीत,ग़ज़ल,व्यंग्य और हिन्दी व पंजाबी की कविताओं को प्रस्तुत किया। मंच संचालन पटियाला से पधारे कवि व 'साहित्य कलश' के प्रमुख सागर सूद ने किया।
इस आयोजन को आयोजित करने के लिए सुरजीत के पुत्र सोनू जोबन व वरिंदर सिंह और पुत्री हरजीत कौर बबली,सुरजीत जी की पत्नी श्रीमती चरनजीत कौर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
सुरजीत ने 'कैपिटल रिपोर्टर' निकालना शुरू था जो किसी न किसी स्थिति में वह उसका प्रकाशन करते रहे,उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया,लेकिन अपने पिता की भाँति कभी अपने पथ से कभी भ्रष्ट नहीं हुए ।
उसके पिता ज्ञानी अमर सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे,लेकिन सरकार से कभी भी कोई राशि नहीं ली।वे पंजाब में मियांवाली (अब पाकिस्तान) के रहने वाले थे। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की मुख़ालफ़त की,जबकि उनके भाई अँगरेज़ों के साथ थे।भाई ने तो अंग्रेजों से रायसाहबी तक पाई थी। एक अंग्रेजपरस्त तो दूसरा देश भक्त। 
वे कहते थे कि --
"मैं हाँ शायर देश दा,जोबन मेरा नाम
मैं सीना तान के आखदा भारत मेरी माँ।
विभाजन के बाद लाहौर,अमृतसर होते हुए मुरादाबाद आये। कुछ समय के बाद 1960 में दिल्ली। पिता के निर्देशानुसार सुरजीत ने पंजाबी भाषा के बजाय हिन्दी भाषा व साहित्य को अपना कार्यक्षेत्र चुना। 'भीष्म का अन्तर्द्वन्द्व' व 'उर्मिला'जैसे खण्ड-काव्य,'जोबन की तरह' ग़ज़ल संग्रह,मत बैठ थककर नवगीत संग्रह तथा युगद्रष्टा गुरु गोबिन्द सिंह,गुरु गोबिन्द सिंह और जापु साहिब,महबलिदानी गुरु तेग बहादुर  और रामगढ़िया शिरोमणि जैसी कृतियाँ उनके परिश्रम,समर्पण,रुचियों और सरोकारों को स्वत: रेखांकित करती हैं।

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